चंपावत जिले के लोहाघाट में स्थित अद्धैत आश्रम मायावती। संवाद
चंपावत। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विश्व प्रसिद्ध अद्वैत आश्रम मायावती आगमन पर वेदमंत्रों के साथ स्वागत किया जाएगा। सघन वन के बीच स्थित मायावती आश्रम में आमतौर पर शांति बनी रहती है। पीएम मोदी के आगमन को लेकर आश्रम को जोडऩे वाले मार्ग पर उनके स्वागत की जोरदार तैयारियां चल रही हैं। हर व्यक्ति की इच्छा प्रधानमंत्री की एक झलक पाने की है।
स्वामी रामकृष्ण मठ बेल्लूर की ओर से संचालित आश्रम के अध्यक्ष स्वामी शुद्धिदानंद महाराज ने पीएम मोदी के यहां आगमन को महत्वपूर्ण घटना बताते हुए कहा कि प्रधानमंत्री के आश्रम में आगमन पर यहां की परंपरा के अनुसार वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ स्वागत किया जाएगा। आश्रम के संतों की ओर से फूल भेंटकर स्वागत किया जाएगा। पीएम उसी कक्ष में ध्यान करेंगे जहां अतीत में स्वामी विवेकानंद ने अपने प्रवास के दौरान ध्यान किया था। संवाद
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19 मार्च 1899 को हुई थी अद्वैत आश्रम मायावती की स्थापना
चंपावत। स्वामी शुद्धिदानंद महाराज के अनुसार मायावती आश्रम की परिकल्पना स्वामी विवेकानंद ने 1896 में स्विट्जरलैंड में आल्प्स पर्वत श्रंखला को देखने के बाद व्यक्त की थी। वह उत्तराखंड के हिमालयी क्षेत्र में ऐसे स्थान में आश्रम स्थापित करना चाहते थे जहां से हिमालय की लंबी श्रृंखला दिखने के साथ वह वनों के बीच में हो। विवेकानंद की भावनाओं के अनुसार उनके शिष्यों ने ऐसे स्थान की तलाश की। पहले यहां चाय का बागान हुआ करता था। जिसे खरीद कर यहां 19 मार्च 1899 को अद्वैत आश्रम मायावती की स्थापना की गयी। संवाद
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जनवरी 1901 से विवेकानंद ने आश्रम में किया था 15 दिनी प्रवास
चंपावत। स्वामी विवेकानंद तीन जनवरी 1901 को मायावती आश्रम पहुंचे थे। जहां उन्होंने 15 दिन तक प्रवास किया और ध्यान लगाया था। आश्रम पहुंचने पर अपनी परिकल्पना के अनुरूप स्थान पाकर देवीधुरा, खेतीखान होते हुए पैदल चलकर आए स्वामी विवेकानंद काफी प्रसन्न हुए और दोबारा से यहां आने की इच्छा जताई थी। संवाद