चंपावत। जिले में बदहाल स्वास्थ्य सेवाओं ने एक नवजात की जान ले ली। अस्पताल में नवजात को भर्ती करने के बाद उसे हायर सेंटर रेफर किया गया। हायर सेंटर ले जाते समय रास्ते में उसकी मौत हो गई। नवजात को हायर सेंटर ले जाने के लिए 108 सेवा भी नहीं मिली। परिवार के लोग ठीक से खुशियां मनाते इससे पहले ही उनका चिराग आंख खोलने से पहले ही दुनिया छोड़ गया।
देवीधुरा निवासी कमला देवी (21) को रविवार को प्रसव पीड़ा हुई। उनकी सास सुबह आठ बजे उसे प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र देवीधुरा ले गई, लेकिन उन्हें स्टाफ नहीं है कहकर इलाज नहीं दिया। परिजनों का आरोप है कि स्टाफ होने के बाद भी इलाज नहीं दिया गया और हायर सेंटर के लिए रेफर कर दिया। इसके बाद गर्भवती को करीब 20 किमी दूर पीएचसी पाटी ले जाया गया। यहां कमला ने बच्चे को जन्म दिया। बाद में नवजात को घर ले गए। । सोमवार दो सितंबर को नवजात को बुखार आ गया। परिजन उसे देवीधुरा अस्पताल ले गए। जहां बुखार नापा तो उसे 104 डिग्री फॉरेन्हाइट बुखार था। कुछ देर बाद नवजात को हायर सेंटर हल्द्वानी जाने का कहा गया।
मृत नवजात के पिता मोहन जोशी ने आरोप लगाया कि बच्चे को हायर सेंटर ले जाने के लिए 108 को कॉल किया लेकिन यह सेवा भी नहीं दी गई। इसके बाद परिजन निजी वाहन से नवजात को हल्द्वानी की ओर ले गए लेकिन रास्ते में नवजात ने दम तोड़ दिया। हल्द्वानी पहुंचे तो चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। पिता मोहन ने तीन घंटे में हल्द्वानी का सफर तय किया। नवजात की मौत के बाद परिवार में हर किसी की आंख नम है।
बुझ गया घर का चिराग
चंपावत। आंखें खोलने से पहले ही परिवार का पहला चिराग बुझ गया। मृतक के पिता मोहन जोशी ने आरोप लगाते हुए कहा कि देवीधुरा अस्पताल में डिलीवरी नहीं की गई। हल्द्वानी रेफर करने पर 108 वाहन की सुविधा नहीं दी गई। तैनात नर्सिंग अधिकारी ने भी फोन नहीं उठाया। परिजनों को पूरी जानकारी नहीं दी गई। उन्होंने कहा कि इस देवीधुरा अस्पताल के लिए उन्होंने जन आंदोलन किए। संघर्षों के बाद अस्पताल खुला, लेकिन उनके पहले बच्चे को ही इलाज नहीं मिला।
कोट
मामला संज्ञान में आया है। मामले में लापरवाही बरती गई है। स्वास्थ्य विभाग की पहली प्राथमिकता बेहतर स्वास्थ्य उपलब्ध कराना है। इस मामले की जांच की जाएगी। लापरवाही बरतने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। - डॉ. देवेश चौहान, सीएमओ, चंपावत।