चंपावत। अक्तूबर में हुए सरकारी सस्ता गल्ला विक्रेताओं के लंबे आंदोलन की गूंज प्रदेश सरकार तक पहुंची। सरकार ने अब गल्ला विक्रेताओं का लाभांश बढ़ाने का निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने 10 नवंबर को हल्द्वानी में लाभांश 18 रुपये प्रति क्विंटल से बढ़ाकर 50 रुपये करने की घोषणा की।
इससे जिले के 338 सरकारी सस्ता गल्ला विक्रेताओं को लाभ होगा लेकिन यह एलान पहाड़ के गल्ला विक्रेताओं को नहीं भा रहा है। उनका कहना है कि पहाड़ में कम राशनकार्डों की वजह से नियत मानदेय ही समस्या का स्थायी समाधान है।
जिला पूर्ति अधिकारी राजेंद्र उप्रेती ने बताया कि शासनादेश आने के बाद नई दर से भुगतान किया जाएगा। अभी गल्ला धारकों को एपीएल राशन पर प्रति क्विंटल 18 रुपये और अन्य श्रेणी के राशन पर 143 रुपये प्रति क्विंटल लाभांश मिलता है। चंपावत जिले में कुल 58154 राशनकार्ड धारकों में से 5801 अंत्योदय, 28774 राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा योजना और 23579 राज्य खाद्य योजना के हैं।
पहाड़ की भौगोलिक परिस्थितियां विषम हैं। यहां ज्यादातर गल्ला विक्रेता 100 से भी कम कार्ड वाले हैं। उनके लिए यह प्रस्ताव कतई लाभदायक नहीं है।
राजीव मुरारी, लोहाघाट।
मैदानी क्षेत्रों में लाभांश बढ़ाना ठीक है, लेकिन पहाड़ में इसका लाभ केवल अधिक कार्ड संख्या वाले गल्ला विक्रेताओं को ही मिलेगा, सामान्य को नहीं।
श्याम सिंह महर, सिप्टी।
सरकार दूरदराज तक समय पर राशन पहुंचाने वाले गल्ला विक्रेताओं की अनदेखी कर रही है। उन्हें सम्मान से गुजरबसर करने लायक मानदेय मिलना चाहिए। भरत राम, पचनई।
पर्वतीय क्षेत्रों में लाभांश बढ़ाने से ज्यादा जरूरी नियमित मानदेय है। सरकार का वर्तमान एलान पहाड़ के गल्ला विक्रेताओं के लिए किसी काम का नहीं है।
पूरन सिंह रावत, सल्ली।