चंपावत। जिला मुख्यालय निवासी और देश के उभरते युवा गायक पवनदीप राजन ने अपनी गायकी का डंका बजाते हुए इंडियन आइडल शो की ट्रॉफी जीत ली है। उन्हें ट्रॉफी के साथ 25 लाख रुपये का चेक और एक स्विफ्ट कार पुरस्कार में मिली है।
15 अगस्त को आयोजित ग्रैंड फिनाले में पवनदीप ने छह प्रतिभागियों के बीच अपनी अमिट छाप छोड़ी। फिनाले में फिल्म दुनिया की कई नामचीन हस्तियों ने पवनदीप समेत सभी प्रतिभागियों का हौसला बढ़ाया।
ग्रैंड फिनाले में पवनदीप राजन को अरुणिता कांजीलाल, मोहम्मद दानिश, शनमुख प्रिया, निहाल तारो और सायली कांबले से कड़ी टक्कर मिली। शो में शनमुख प्रिया छठे नंबर पर रहीं। उनके बाद पांचवें पर निहाल हैं।
मोहम्मद दानिश चौथे नंबर पर, सायली कांबले सेकंड रनरअप बनीं और अरुणिता जीत से सिर्फ एक कदम दूर फर्स्ट रनरअप रहीं। पवनदीप की जीत पर दर्शकों के बीच बैठी उनकी मां सरस्वती राजन काफी भावुक हो गईं।
फिनाले एपिसोड में संगीतकार अनु मलिक, सोनू कक्कड़, हिमेश रेशमिया, उदित नारायण, अलका याग्निक, कुमार सानू, विशाल ददलानी, मीका सिंह आदि ने प्रतिभागियों का हौसला बढ़ाया।
पवन के इंडियन आइडल बनने पर बांटी मिठाई
लोहाघाट (चंपावत)/पिथौरागढ़। पवन दीप राजन के इंडियन आइडल बनने पर लोगों ने खुशी जताकर मिठाई बांटी। रामलीला कमेटी के अध्यक्ष जीवन मेहता और कुमाऊं लोक सांस्कृतिक कला दर्पण के अध्यक्ष भैरव राय के नेतृत्व में मीनाबाजार में लोगों ने मिठाई बांटकर पवन की जीत का जश्न मनाया।
जीवन और भैरव ने बताया कि पवनदीप ने उनके निर्देशन में कई मंचों में प्रस्तुतियां देकर लोगों का दिल जीता था। पवन ने अपनी जीत से लोहाघाट, चंपावत के साथ उत्तराखंड का नाम देश दुनिया में रोशन किया है।
जीवन और भैरव ने बताया कि पवन के क्षेत्र में लौटने पर उनका भव्य स्वागत किया जाएगा। इस मौके पर जिला पंचायत अध्यक्ष के प्रतिनिधि प्रकाश राय, एलएम कुंवर, प्रकाश चंद्र राय, गिरीश कुंवर, हिमांशु राय, हेम पुनेठा, हेमंत पांडेय, लोकेश पांडेय आदि रहे।
उधर, पिथौरागढ़ के गांधी चौक में आयोजित कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि पवनदीप ने 23 वर्ष की उम्र में इंडियन आइडल का खिताब जीतकर उत्तराखंड का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया है।
इस अवसर पर डॉ. गुरुकुलानंद कच्चाहारी, डीएन भट्ट, हेमराज बिष्ट, जुगल किशोर पांडेय, तपन रावत, बुद्धिबल्लभ भट्ट, गोपाल दत्त सती, गिरधर सिंह बिष्ट आदि रहे।
पवनदीप को मुकाम दिलाने में रंग लाया पिता सुरेश राजन का संघर्ष
चंपावत। जिले के उभरते युवा गायक पवनदीप राजन ने सोनी टीवी के ‘इंडियन आइडल’ शो के 12वें सीजन को जीत लिया है। इससे पूर्व वह 2015 में एंड टीवी के सिंगिंग रियल्टी शो ‘द वॉइस इंडिया’ का खिताब भी जीत चुके हैं।
युवा गायक पवनदीप राजन की जादू भरी आवाज के आज भले ही हजारों-लाखों लोग दीवाने हो गए हैं, लेकिन पवनदीप को गायकी के आसमान में स्थापित करने में उनके पिता कुमाऊंनी लोकगायक सुरेश राजन की कड़ी मेहनत और लगन शामिल है।
महज तीन साल की उम्र से पिता ने पवनदीप को गीत-संगीत की बारीकियां सिखाने के साथ ही विभिन्न प्रकार के वाद्य यंत्रों को बजाना सिखाया। इसी कारण पवनदीप चंपावत जिले के एक छोटे से गांव से आज मायानगरी मुंबई तक छा गए हैं।
लोकगायक सुरेश राजन के बेटे पवनदीप का जन्म 27 जुलाई 1996 को चंपावत जिले में हुआ था। बचपन में ही उनकी रुचि संगीत में थी और उनकी रुचि को देखते हुए उनके पिता ने उन्हें संगीत सिखाना शुरू किया।
तीन साल की उम्र से वह पवनदीप को अपने कंधे पर बैठाकर खुद स्टेज शो और अन्य सांस्कृतिक कार्यक्रमों में ले जाते थे। सुरेश राजन बताते हैं कि पवनदीप ने डेढ़ साल की उम्र में अचानक थाली पर दादरा की ताल बजाई थी और तीन साल की उम्र से तबला वादन शुरू कर दिया था।
उम्र के साथ पवन की संगीत के प्रति बढ़ती रुचि को देखकर उन्होंने अपना काम धाम छोड़कर पवन को गीत संगीत में पारंगत बनाया।
एंड टीवी के टैलेंट सर्च शो ‘द वॉयस इंडिया’ के पहले सत्र के विजेता बनने के बाद कई फिल्मों और एलबमों में गाने के साथ ही लाइव शो में अपना डंका बजाया है।
पवनदीप को दर्शकों का लगातार मिलता रहा समर्थन
चंपावत। सोनी टीवी पर इंडियन आइडियल शो के 12वें संस्करण के शुरू होने के बाद से ही पवनदीप को शो के जजों के साथ दर्शकों का लगातार समर्थन मिल रहा था। पवनदीप को शो का विजेता बनाने के लिए उत्तराखंड के तमाम सोशल मीडिया ग्रुप पर लोग एक दूसरे से वोट देने की अपील कर रहे थे।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी उत्तराखंड की जनता से पवनदीप को विजेता बनाने के लिए अपील की थी, जबकि पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने उन्हें उत्तराखंड का ब्रांड एंबेसडर बनाया था। पवनदीप का खिताब उत्तराखंड के लिए एक नई उम्मीद लेकर आया है। पहाड़ी क्षेत्र में जो युवा संगीत के क्षेत्र में नाम कमाना चाहते हैं, वह भी पवन से प्रेरणा लेकर आगे बढ़ सकते हैं।
अमर उजाला से मिले अपार समर्थन को अभूतपूर्व बताया
चंपावत। पवनदीप राजन के पिता सुरेश राजन पवनदीप के गायकी के सफर को मुकाम तक पहुंचाने में अमर उजाला से मिले अपार समर्थन को अभूतपूर्व बताते हैं।
उनका कहना है कि बचपन से ही अमर उजाला ने पवनदीप की प्रतिभा को हर स्तर पर प्रोत्साहित किया। उनके संघर्ष और मेहनत के संबंध में परिजनों के साथ ही अमर उजाला का सहयोग बेहद उल्लेखनीय है। (संवाद)
कोरोना काल में घर में ही खोला रिकॉर्डिंग स्टूडियो
चंपावत। पवनदीप राजन ने कोरोना महामारी के कारण एक वर्ष पूर्व अपने ही घर में आधुनिक रिकॉर्डिंग स्टूडियो भी खोला है। इसमें स्थानीय कलाकारों को रिकॉर्डिंग की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है।
उनके पिता सुरेश राजन बताते हैं कि स्थानीय स्तर पर रिकॉर्डिंग की सुविधा न होने के कारण कलाकारों को परेशानी हो रही थी। इसी समस्या को सुलझाने के लिए पवन ने रिकॉर्डिंग स्टूडियो खोला है।