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चलो मन वृंदावन की ओर प्रेम रस जहां छलके है...

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लोहाघाट के सुंई में आयोजित बैठकी होली में झूमते होल्यार। - फोटो : LOHAGHAT
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लोहाघाट (चंपावत)। पौष माह के पहले रविवार से बैठकी होलियों का दौर शुरू हो गया है। सुंई और पाटी में होल्यारों ने खूब रंग जमाया। पाटी में सीएस मौनी ने राग पटदीप में ‘चलो मन वृंदावन की ओर प्रेम रस जहां छलके है, कृष्ण नाम की भोर’ सुनाकर सबको होली के रंग में रंग दिया।
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सुंई में भगवती जागरण समिति की ओर से कैलाश चंद्र चौबे के आवास में बैठकी होली का आयोजन किया गया। कृष्णानंद चौबे ने राग काफी में ‘गणपति को भज जीजै रसिक वो तो आदि कहावे...’ से गणेश वंदना की। उमेश चौैबे ने भगवान शिव की वंदना में ‘जै-जै-जै शिव शंकर योगी, जै भोला योगी’, उर्वादत्त चौबे ने राग कहरवा में ‘बिन बांवरे तूने हीरा जनम गवायो’ सुनाया। इसके अलावा रवि चौबे और समिति अध्यक्ष राजेश चौबे ने भी होली गायन किया। वहां प्रयाग दत्त चौबे, केशव चौबे, केदार दत्त, बसंत चौबे, मोहन चौबे, मदन मोहन आदि थे। इधर पाटी में श्री मष्टा संगीत कला समिति की ओर से आयोजित बैठकी होली में एमसी भट्ट ने राग काफी में भव भंजन गुण गाऊं मै अपने राम को रिझाऊं, बीएस मेहता ने राग काफी में जटन विराजत गंगे, भोले नाथ दिगंबर की शानदार प्रस्तुतियां देकर श्रोताओं की खूब वाहवाही लूटी। इसके अलावा बीडी पचौली, कृष्णनाथ गोस्वामी, कंचन अवस्थी ने भी होली गाई। वहां विशाल पचौली, ललित मोहन गहतोड़ी, अंकित गहतोड़ी, योगेश, पंकज आदि थे।
कैलाश बने अध्यक्ष
पाटी (चंपावत)। मष्टा संगीत कला समिति ने द्विवार्षिक कार्यकारिणी का गठन किया। सर्वसहमति से कैलाश भट्ट को अध्यक्ष, एमसी भट्ट को सचिव, बीड़ी पचौली को उपाध्यक्ष और संरक्षक सीएस मौनी, बीएस मेहता, माधवानंद पचौली, रवीश पचौली को मनोनीत किया गया।
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महाकाली मंदिर में बैठकी होली का भव्य आयोजन
गंगोलीहाट(पिथौरागढ़)। महाकाली मंदिर में रविवार रात बैठकी होली का आयोजन किया गया। होली की शुरुआत वीरेंद्र रावल ने राग श्याम कल्याण में ‘माई के मंदिरवा में दीपक वारो’ से की। श्यामाचरण उप्रेती ने राग काफी जय जय जय मां काली, कैलाश सिंह ने राग जंगला काफी बाजी बाजी रे मुरलिया कहीं जमुना किनारे गाई। इसके अलावा कपिल नेगी, विशाल मिरासी और बसंत लाल ने भी विभिन्न रागों में होली गायन किया। वहां शंकर रावल, पूरन रावल, दिगंबर रावल, ललित उप्रेती, भगवती प्रसाद उप्रेती, विद्या प्रसाद पाठक आदि थे।
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