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... आखिर 218 घंटे बाद साफ हुआ स्वांला से मलबा, खुला राष्ट्रीय राजमार्ग

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स्वांला से मलबा हटने के बाद एनएच पर रवाना होता पहला कैंटर। फोटो: संवाद न्यूज एजेंसी - फोटो : CHAMPAWAT
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चंपावत। 23 अगस्त की सुबह 8:37 बजे का वक्त और तीन सितंबर की सुबह 11:15 बजे का समय, ये दिन और वक्त टनकपुर-पिथौरागढ़ राष्ट्रीय राजमार्ग के लिए खास है। 11 दिन बाद (करीब 267 घंटे) बाद स्वांला में आए मलबे को हटाया जा सका और यहां फंसे वाहनों को गंतव्य के लिए रवाना किया गया। टनकपुर से 23 अगस्त को चले कैंटर ने शुक्रवार 11:15 बजे स्वांला की बाधा पार की।
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यह ट्रक एक घंटे पांच मिनट बाद यानी 12:20 बजे चंपावत पहुंचा। वहीं, रोडवेज की लोहाघाट डिपो की एक बस शुक्रवार दोपहर बाद टनकपुर होते हुए देहरादून रवाना हुई। एजीएम नरेंद्र कुमार गौतम ने बताया कि शनिवार से टनकपुर रूट से पहले की तरह ही सभी बस सेवाएं संचालित की जाएंगी।
टनकपुर-पिथौरागढ़ राष्ट्रीय राजमार्ग पर 23 अगस्त की सुबह स्वांला में पहाड़ी दरकने से 250 मीटर से अधिक सड़क बुरी तरह से बर्बाद हो गई थी। मलबा आने के बाद यह सड़क पूरे 11 दिन बाधित रही। यहां 55 वाहन फंसे थे। डीएम विनीत तोमर का कहना है कि सड़क खोलने के लिए एनएच खंड सहित सभी संबंधित एजेंसियों ने प्रयास किए लेकिन कई बार पत्थर और मलबा आने से काम में लगातार अवरोध आता रहा। अब शुक्रवार को यह बाधा दूर करने के साथ आवाजाही शुरू हुई। इसी के साथ चंपावत और लोहाघाट में भी वाहनों की आवाजाही शुरू होने से बाजार में भी चहलपहल तेज हुई। रोडवेज शनिवार से सभी सेवाओं का संचालन करेगा।
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होटल में खाते और ट्रक में सोते थे चालक
चंपावत। स्वांला में मलबा आने से 12 दिन तक 55 से अधिक वाहन फंसे रहे। इनमें से ज्यादातर वाहन सामान ला रहे थे। सेना की ड्यूटी में लगे 12 निजी वाहन भी यहां अटके थे। बरेली से पिथौरागढ़ जा रहे ट्रक के चालक अशोक गोस्वामी और टनकपुर से ओगला जा रहे ट्रक के चालक जीत सिंह ने बताया कि इतना लंबा वक्त काटना मुश्किल रहा। जिंदगी में यह पहला मौका था, जब वाहन के साथ इतना लंबा फंसे। वे इस अवधि में ट्रक में सोए। खाने के लिए पास के होटल का सहारा था। होटल में खाने के वाजिब दाम लिए गए। इस दौरान चाय और खाने में काफी खर्च हुआ। समय काटने के लिए स्थानीय दुकानदारों के साथ बात करते रहे। गैस सिलिंडर से भरे दो ट्रक भी यहां फंसे थे।
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