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वन अधिकारियों का दो दिनी एम-स्ट्राइप सॉफ्टवेयर प्रशिक्षण शुरू

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वन अधिकारियों को प्रशिक्षण की जानकारी देते भारतीय वन्यजीव संस्थान के विशेषज्ञ डॉ. हरीश गुलरिया। - फोटो : TANAKPUR
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टनकपुर (चंपावत)। वन एवं वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए जंगल में अब हाईटेक गश्त होगी। जल्दी ही नंधौर वन्यजीव अभयारण्य के हर बीट अधिकारी को एम-स्ट्राइप्स सॉफ्टवेयर युक्त एंड्राइड मोबाइल फोन दिए जाएंगे। इसीलिए हल्द्वानी, तराई पूर्वी और चंपावत वन प्रभाग के वन अधिकारियों का रविवार से दो दिवसीय एम-स्ट्राइप्स सॉफ्टवेयर, पेट्रोलिंग एवं पारिस्थितिक निगरानी का प्रशिक्षण शुरू हो गया है। भारतीय वन्यजीव संस्थान के विशेषज्ञों की टीम वन अधिकारियों को वन और वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए डिजिटल प्रशिक्षण दे रही है।
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हल्द्वानी वन प्रभाग के डीएफओ कुंदन कुमार के निर्देश पर वन निगम के प्रकाष्ठ डिपो परिसर में यह प्रशिक्षण दिया जा रहा है। शिविर के पहले दिन भारतीय वन्यजीव संस्थान (डब्ल्यूआईआई) देहरादून के डॉ. हरीश गुलेरिया ने पेट्रोलिंग से संबंधित बारीकियां, जरूरी निर्देश दिए। संस्थान के रिसोर्स पर्सन आशीष और देव रंजन ने एम-स्ट्राइप्स और इकोलॉजिकल मॉनिटरिंग एप्लीकेशन का सदुपयोग करना सिखाया। प्रशिक्षण का समापन सोमवार को होगा। प्रशिक्षण में हल्द्वानी वन प्रभाग के एसडीओ आरके मौर्य, रेंजर मनीष कुमार, चंपावत वन प्रभाग के रेंजर सुनील शर्मा, गुलजार हुसैन, हेम चंद्र गहतोड़ी, तराई पूर्वी वन प्रभाग के खटीमा रेंजर राजेंद्र सिंह मनराल, डब्ल्यूआईआई के डॉ. नवीन जोशी, आशीष, अजय चौहान आदि हैं।
जंगल में घूमते मिले दो संदिग्ध पूछताछ कर छोड़े
टनकपुर (चंपावत)। शारदा नदी पार नेपाल सीमा से लगे शारदा टापू के जंगल में वन्यजीव के शिकार की सूचना से शारदा रेंज के वनकर्मियों की सक्रियता बढ़ गई है। विभाग की टीम ने जंगल से दो संदिग्ध नेपाली युवकों को पकड़ा, जिन्हें कोई साक्ष्य न मिलने पर पूछताछ के बाद छोड़ दिया गया।
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हल्द्वानी वन प्रभाग के शारदा रेंज के नेपाल सीमा से लगे शारदा टापू के जंगल में नेपाल के लकड़ी तस्कर और वन्यजीव शिकारी सक्रिय हैं, जो आए दिन धड़ल्ले से पेड़ों को काटनेे के साथ ही वन्यजीवों का शिकार भी कर रहे हैं। बताया गया कि रविवार सुबह मुखबिर ने जंगल में वन्यजीव शिकारियों की मौजूदगी और फायरिंग की आवाज सुनाई देने की सूचना दी।
आनन-फानन विभाग की टीम फौरन जंगल पहुंची तो वहां दो नेपाली युवक संदिग्ध अवस्था में घूमते मिले, लेकिन उनके पास शिकारी होने का कोई प्रमाण नहीं मिला। पकड़े गए युवकों से वनाधिकारियों ने गहन पूछताछ की, लेकिन साक्ष्य के अभाव में उन्हें छोड़ दिया गया। हालांकि पकड़े गए युवकों में एक युवक के तार वन्यजीव अंग तस्कर गिरोह से जुड़े हैं, लेकिन साक्ष्यों के अभाव में वह हमेशा वन विभाग की गिरफ्त से बचता रहा है।
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