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पहाड़ की सीटों पर नाजुक हालत ने बढ़ाई भाजपा की फिक्र!

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चंपावत में भाजपा की बैठक में मौजूद कार्यकर्ता। फोटो: संवाद न्यूज एजेंसी - फोटो : CHAMPAWAT
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चंपावत। भाजपा के उत्तराखंड प्रभारी दुष्यंत कुमार गौतम ने भले ही अबकी बार 60 के पार का नारा दिया है, लेकिन 13 जिलों वाले इस प्रदेश में पहाड़ के दो (चंपावत और पिथौरागढ़) जिलों में पार्टी की हालत बेहद नाजुक है। सूत्र बताते हैं कि पार्टी स्तर से हुए सर्वे और स्वतंत्र जरिये से मिल रहे ऐसे संकेतों ने भाजपा की चिंता को बढ़ाया है।
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नेपाल सीमा से लगे चंपावत और पिथौरागढ़ जिले में विधानसभा की कुल छह सीटें हैं। 2017 के चुनाव में पार्टी ने धारचूला को छोड़ शेष पांच सीटें जीती थी, लेकिन दो माह पूर्व हुए सर्वे और कई स्रोतों से मिली रिपोर्ट में पार्टी इस वक्त यहां महज एक सीट पर ही बेहतर स्थिति में है। पांच जगह उसकी हालत नाजुक बताई गई है। इस कमजोर स्थिति के लिए विधायकों की आम लोगों से दूरी, अक्सर फोन को रिसीव तक न करना, कोरोना काल में निष्क्रियता, संगठन की अनदेखी, जनसमस्याओं को हल करने में उदासीनता जैसे कारण बताए गए हैं।
इस सर्वे के सामने आने के बाद कुछ विधायक फिर से सक्रिय हो गए हैं। सूत्र बताते हैं कि अन्य समीकरणों के अलावा सर्वे की रिपोर्ट, कामकाज और आम लोगों में विधायकों की छवि टिकट का मुख्य आधार होगा। अब खिसकती सियासी जमीन को वापस पाने के लिए पार्टी नेतृत्व तगड़ा होम वर्क कर रहा है। और इसमें कई नए चेहरे उतारने जैसे कदम भी उठाने के संकेत मिले हैं। इस बारे में भाजपा नेता कुछ भी कहने से बच रहे हैं। वहीं जिला मीडिया प्रभारी मोहन अधिकारी दावा करते हैं कि पार्टी की ताकत कम नहीं हुई है। पार्टी दोनों जिलों की सभी छह सीटें जीतेगी।
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