टनकपुर (चंपावत)। बाल प्रहरी की ओर से हुई बच्चों की अभिव्यक्ति कार्यशाला के तीसरे दिन कवि सम्मेलन में कवियों ने कविता के रंग बिखेरे। खटीमा साहित्य समूह के संचालक महेंद्र प्रताप नंद की अध्यक्षता में हुई कवि सम्मेलन का आगाज आकाश प्रभाकर ने तेवर रखती बेटी देखो झांसी वाली रानी की से किया।
रवींद्र पांडे (पपीहा) ने चलो हवा में चलकर देखे, जरा किनारे छू कर देखें, दीपक फुलारा बेबाक ने लक्ष्य अटल सिद्धांत अटल उम्मीद जगाने आया हूं, राम रतन यादव ने किस तरह किसी मोड़ पे चाहत से मिलेगी, सपनों को ले बारात गुलिस्तां सी पिघलेगी, त्रिलोचन जोशी ने अपना है कौन यहां, देखो चाहे जहां तहां... सुनाया।
इसी तरह हेमा जोशी (परू) ने बढ़ते नहीं कदम मेरे कुमाऊं गढ़वाल से आगे, बाल कवि नूरे निशा ने नन्ही चुहिया झूला झूले खा खाकर मक्की के पूले, शांति देवी ने मेरे देश की जय हो, नीलम पांडे (नीलिमा) ने झूठी पहचान इकट्ठे करने से क्या होगा, रावेंद्र कुमार (रवि) ने नथनी की परछाई पर सो रहा हंसी जा टुकड़ा, महेंद्र प्रताप पांडे ने खो गई है िचिट्ठी पत्री, कैलाश चंद्र पांडेय ने तोरे पद पंकज ना छोड़ू रे कविता सुनाई।
बाल प्रहरी पत्रिका अल्मोड़ा के संपादक उदय किरौला ने कुमाऊंनी कविता सुनाई। टनकपुर की शिक्षाविद जानकी खर्कवाल ने युवाओं को अच्छे काम के लिए प्रेरित किया। नीरज सिंह ने पिता की महत्ता, कल्पना आर्या ने अंतर्मन, डॉ. देवीदत जोशी ने सैनिक के बलिदान और भुवनेश्वरी जोशी ने रक्षाबंधन के बदलते स्वरूप पर रचना पेश की। कवि गोष्ठी में बाल कवि ऋषि शर्मा, एकांशु भट्ट, पीयूष पांडे ने रचनाएं प्रस्तुत कीं।