लोहाघाट (चंपावत)। चंपावत जिले के पर्वतीय क्षेत्र का एकमात्र रोडवेज स्टेशन बदहाल है। स्टेशन में कर्मचारी जीर्ण-शीर्ण टिनशेड में काम करने को मजबूर हैं। गर्मियों में जहां इन कमरों में तपिश रहती है वहीं बारिश में छत टपकती है। इससे दस्तावेजों के भी खराब होने का अंदेशा बना रहता है।
वर्ष 1977 में लोहाघाट में रोडवेज बस स्टेशन की स्थापना की गई थी। पांच वर्ष बाद इसका उच्चीकरण कर रोडवेज डिपो बना दिया गया। तब से कर्मचारी टिनशेड में ही काम कर रहे हैं। डिपो में यात्रियों और कर्मचारियों के लिए शौचालय और शुद्ध पेयजल की भी कोई पुख्ता व्यवस्था नहीं है। डिपो के सहायक महाप्रबंधक का कार्यालय भी किराये के भवन में चल रहा है।
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टिनशेड में इन काउंटरों पर होता है काम
लोहाघाट। डिपो का कैश काउंटर, बुकिंग काउंटर, ई-टिकटिंग, वरिष्ठ स्टेशन प्रभारी कार्यालय, डीबीआर, वेतन, समय संचालन कक्ष, चालक-परिचालक कक्ष हैं, लेकिन इनमें बैठकर काम करना आसान नहीं है। संवाद
बसों की भारी कमी झेल रहा रोडवेज डिपो
लोहाघाट डिपो में बसों का बेड़ा लगातार कम होता जा रहा है। वर्तमान में डिपो में 24 बस संचालन में हैं, जबकि पांच बस इंजन की खराबी के चलते टनकपुर क्षेत्रीय कार्यशाला में खड़ी हैं, एक बस लोहाघाट कार्यशाला में खड़ी है। डिपो से दिल्ली, देहरादून, हरिद्वार, बरेली, गुरुग्राम, ऋषिकेश, नैनीताल, हल्द्वानी आदि स्थानों के लिए बस सेवाओं का संचालन किया जाता है। - सुशील व्यास, प्रभारी फोरमैन, लोहाघाट
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पक्के भवन बनाने का भेजा जाएगा प्रस्ताव। वर्तमान तक लोहाघाट रोडवेज स्टेशन का प्रस्ताव नहीं गया है। भविष्य में टिनशेड के स्थान पर पक्के भवन बनाने का प्रस्ताव उच्चाधिकारियों को भेजा जाएगा। - नरेंद्र गौतम, सहायक महाप्रबंधक, लोहाघाट रोडवेज