चंपावत। बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ का सरकारी नारा जमीन पर निष्प्रभावी लग रहा है। जिला मुख्यालय का जीजीआईसी इसकी एक बानगी है। यहां छात्राओं को पढ़ाने के लिए न पर्याप्त शिक्षिकाएं हैं और न ही जरूरी सुविधाएं। जिला मुख्यालय के जीजीआईसी में 400 से अधिक छात्राओं को पढ़ाने के लिए शिक्षिकाओं की भारी कमी है। इंटर में छह विषयों को पढ़ाने के लिए प्रवक्ता नहीं, तो एलटी में तीन शिक्षिकाओं की कमी है। हिंदी पढ़ाने के लिए न एलटी में शिक्षक हैं और न ही इंटर में प्रवक्ता।
जीजीआईसी इंटर में सिर्फ दो विषयों भौतिक विज्ञान, गृह विज्ञान की प्रवक्ता हैं। जीव विज्ञान और भूगोल में अतिथि प्रवक्ता हैं। एलटी में भी 11 में से सात ही पद भरे जा सके हैं। एलटी में विज्ञान की अतिथि शिक्षक है। कॉलेज का लिपिकीय काम करने वालों की भी भारी कमी है। अभिभावकों का कहना है कि कोरोना काल के बाद भी कॉलेज में पढ़ाई प्रभावित रही है। इसकी वजह शिक्षिकाओं की कमी रही। इसके बावजूद यहां हाईस्कूल और इंटर बोर्ड का परीक्षा परिणाम अच्छा रहा। इंटर में 162 में से 148 और हाईस्कूल में 67 में से 56 पास हुए हैं। सीईओ जितेंद्र सक्सेना का कहना है कि जीजीआईसी में शिक्षिकाओं की तैनाती के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। नई नियुक्तियां होने पर जीजीआईसी के खाली पद भरने के प्रयास किए जाएंगे।
जीजीआईसी में खाली 11 पद
प्रवक्ता - हिंदी, अंग्रेजी, रसायन विज्ञान, गणित, अर्थशास्त्र, मनोविज्ञान।
एलटी शिक्षिका - हिंदी, विज्ञान, सामाजिक विज्ञान।
मिनिस्टीरियल संवर्ग - वरिष्ठ प्रशासनिक सहायक और कनिष्ठ सहायक।
शिक्षिकाओं के खाली पदों की वजह से पढ़ाई पर बुरा असर पड़ रहा है। इसके लिए कई बार उच्चाधिकारियों से आग्रह किया जा चुका है। फिलहाल उपलब्ध शिक्षिकाओं से ही इन विषयों को भी पढ़ाकर भरपाई करने का प्रयास किया जा रहा है। - निधि सक्सेना, प्रभारी प्रधानाचार्य, जीजीआईसी चंपावत।