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हार को हराने और जीत की जिद से डॉ. दीक्षा ने चूमा सफलता का शिखर

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यूपीएससी की परीक्षा में 19वें स्थान पर रही डॉ. दीक्षा जोशी। - फोटो : CHAMPAWAT
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चंपावत। पहाड़ की बेटी ने कमाल किया है। सफलता का शिखर छुआ है लेकिन कामयाबी की ये बुलंदी अनायास नहीं है। इसमें हर रंग हैं। नाकामी के खट्टे अनुभव भी और इसे पीछे छोड़ आगे बढ़ते जाने का साहस भी। हार को हराने और जीत की जिद करना। तभी तो पहले दो प्रयास में संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा पास करने से चूकने वाली सीमांत पिथौरागढ़ जिले की बेटी ने सफलता का संसार अपनी झोली में डाला।
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भाजपा प्रदेश प्रवक्ता सुरेश जोशी की असाधारण प्रतिभावान बेटी डॉ. दीक्षा ने डॉक्टरी की पढ़ाई और इंटर्नशिप के बाद आईएएस को जिंदगी का मकसद बनाया और तीसरे प्रयास में उन्होंने कामयाबी का वह मुकाम पाया। यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा 2021 में 19वां स्थान पाकर टॉप ट्वेंटी में शामिल डॉ. दीक्षा उत्तराखंड के अभ्यर्थियों में सबसे आगे रहीं। संवाद न्यूज एजेंसी के चंद्रशेखर जोशी ने फोन से उनकी तैयारियों से लेकर सफलता तक के सफर पर बात की।
आप डॉक्टर हैं, चिकित्सा पेशे के बजाय सिविल सर्विसेज में आने की क्या खास वजह रही?
-सिविल सर्विसेज परीक्षा के लिए शुरुआत से मोटिवेशन था। पिथौरागढ़ में रहती हूं। यहां की समस्याएं देखी हैं। प्रशासन के जरिये सामाजिक जिम्मेदारी और जनकल्याण की सोच थी लेकिन एमबीबीएस की इंटर्नशिप के अनुभव में देखा कि अस्पताल में दवाएं नहीं थीं। मशीनें अनुपयुक्त थीं। इससे डॉक्टर भी ठीक से काम नहीं कर पा रहे थे। इसलिए मुझे लगा कि प्रशासनिक सेवा में आने से बेहतर काम कर सकूंगी।
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शुरू के दो प्रयासों में सफलता न मिलने की क्या वजह रही?
पहला प्रयास इंटर्नशिप के साथ वर्ष 2019 में किया था। दूसरी बार तैयारी तो की थी लेकिन रणनीतिक चूक की वजह से सफलता नहीं मिली।
तीसरे प्रयास में आपने न केवल सफलता प्राप्त की, बल्कि टॉप ट्वेंटी में जगह बनाई, इसके लिए क्या खास किया?
- शुरुआत में अध्ययन सामग्री के चयन में कुछ कमी रही। कोचिंग सामग्री का अधिक उपयोग ठीक था। पुराने प्रश्नपत्रों का भी सही विश्लेषण नहीं किया। अभ्यास के लिए मॉक पेपर के विश्लेषण में भी कमी थी। आत्मसुधार नहीं हो पा रहा था। इस वजह से परीक्षा के दिन भी दबाव बना लिया था। घबराहट से दो-चार सवाल गलत हुए। बाद में पिछले साल की इन गलतियों को दूर किया। सबसे पहले अध्ययन सामग्री के संसाधनों में सुधार किया। कोचिंग सामग्री का सीमित और जरूरी उपयोग किया। एनसीईआरटी से ज्यादा सवाल आते थे। इसलिए उस ओर अधिक ध्यान दिया।
मुख्य परीक्षा में वैकल्पिक विषय क्या था?
-चिकित्सा विज्ञान।
इस परीक्षा में माध्यम का कितना महत्व है, अंग्रेजी माध्यम से क्या कोई अतिरिक्त लाभ मिलता है?
- यूपीएससी भाषा के आधार पर भेदभाव नहीं करता है। हिंदी माध्यम में स्तरीय पुस्तकों की अमूमन कमी होने से समझने में दिक्कत आती है। टेस्ट सीरीज या मेंटर गाइडेंस भी ज्यादातर अंग्रेजी में मिलती है लेकिन हिंदी माध्यम से अच्छी मेरिट आने से अब हिंदी सामग्री में सुधार हो रहा है।
मुख्य परीक्षा की पढ़ाई की क्या रणनीति रही?
- इस बार प्री और मुख्य परीक्षा में काफी कम गैप था, मात्र 65-70 दिन का। दोहराने के अलावा उत्तर लिखने का अभ्यास किया। कोचिंग संस्थानों के वन टू वन फीड बैक कोर्स से भी लाभ हुआ। प्रारंभिक और मुख्य परीक्षा के बीच उत्तर लिखने का अधिकतम अभ्यास करना फायदेमंद रहता है।
सामान्य अध्ययन (जीएस) में कौन-कौन सी पुस्तकें उपयोगी हैं?
-जीएस में एनसीईआरटी की पुस्तकें काफी उपयोगी हैं। बेसिक समझ के लिए एनसीईआरटी से शुरुआत करें। भूगोल, इतिहास, अर्थव्यवस्था, राजनीति की पुस्तकों का चयन विषयवस्तु को समझने की दृष्टि से करें। लक्ष्मीकांत की राजनीति विज्ञान की पुस्तक में संविधान के अनुच्छेद सरल तरीके से बताए गए हैं। विषय के टॉपिक के नाम के साथ यूपीएससी लिखने बाद गूगल सर्च करने पर स्तरीय सामग्री मिल जाती है। इससे समझने में काफी मदद मिलती है।
प्री, मुख्य परीक्षा और साक्षात्कार की तैयारी कैसे की?
- पूरी किताब पढ़कर समझ लें, एक से दो बार दोहराएं। फिर मॉक अभ्यास करें। मुख्य परीक्षा के लिए नोट्स तैयार कर एक से दो बार रीचेक कर लें। रिवीजन और लिखने का अभ्यास भी करें।
कितने घंटे और कैसे पढ़ा जाए?
- आईएएस की तैयारी के लिए सालभर का समय चाहिए। रोज सात-आठ घंटे पढ़ें। मैं पढ़ने का समय डायरी में लिखती थी। इससे समय की बर्बादी नहीं होगी। समय का प्रबंधन बेहतर होगा। परीक्षा के आखिरी दौर में 12-13 घंटे तक ध्यान से पढ़ना चाहिए।
साक्षात्कार कितनी देर चला, क्या सभी सवालों के ठीक जवाब दिया?
-साक्षात्कार 30-35 मिनट तक चला। चिकित्सा विज्ञान से संबंधित काफी सवाल थे। उत्तराखंड के मुख्य सचिव बनने पर क्या बदलाव करेंगे, क्या प्राथमिकता होगी, शिक्षा में डिजिटल सिस्टम में क्या चुनौती सहित कई सवाल पूछे गए। मैंने तीन-चार उत्तर नहीं दिए थे। सभी जवाब सही होने की उम्मीद साक्षात्कार बोर्ड भी नहीं करता है लेकिन उत्तर न आने पर विनम्रतापूर्वक सॉरी बोलें।
पहाड़ की सबसे प्रमुख चुनौतियां क्या हैं?
-अभी कैडर तय नहीं हुआ है, लेकिन मेरी पसंद उत्तराखंड में सेवा करने की है। सबसे बड़ी दिक्कत कनेक्टिविटी की है। सड़क और संचार की स्थिति को सुधारना है। सड़क के हालात कुछ बेहतर हो रहे हैं। उड़ान स्कीम से पहाड़ के दूरदराज के क्षेत्रों को लाभ होगा। दूरदराज और बाहर से लोगों के आने पर आधारभूत ढांचा बेहतर हो सकता है। आर्थिक संसाधनों को बढ़ा कर पलायन पर रोक लगे। पर्यटन को बेहतर कर सकते हैं। हरिद्वार, चारधाम के अलावा छोटे पर्यटक स्थलों को बढ़ाना होगा। पिथौरागढ़ जिले में साहसिक पर्यटन को बेहतर करने से आर्थिक मौके बढ़ेंगे।
आईएएस अफसर के रूप में सबसे पहला काम क्या करना चाहेंगी?
- स्वास्थ्य सुविधा में सुधार और सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन को बेहतर करना पहली प्राथमिकता है। पिथौरागढ़ सहित ज्यादातर पहाड़ी क्षेत्रों के सरकारी अस्पतालों में दवाओं की कमी है। जांच के लिए स्टाफ और मशीनें कम हैं। हल्द्वानी या दूसरे शहरों जाने में परेशानी होती है। इलाज के साथ ही रहने, खाने-पीने में भी खूब खर्च होता है। महिलाओं में कुषोषण की दिक्कत भी दूर करनी है।
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सफलता के सूत्र
अध्ययन में लापरवाही नहीं, पढ़ाई में निरंतरता, उत्तरों को लिखने का अभ्यास और कारगर रणनीति
दीक्षा का स्कोर बोर्ड
मुख्य परीक्षा के अंक : 1750 में से 827
साक्षात्कार के अंक : 275 में से 193
कुल अंक : 2025 में से 1020
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