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संबद्धीकरण निरस्त करने से बिगड़ेगी आईसीयू की सेहत!

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चंपावत के आईसीयू में मरीज। फोटो: संवाद न्यूज एजेंसी - फोटो : CHAMPAWAT
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चंपावत। जिला अस्पताल के सघन निगरानी इकाई (आईसीयू) की सेहत बिगड़ने की आशंका है। यहां संबद्ध किए गए कार्मिकों को उनके मूल स्थानों पर भेजने के आदेश से ये संकट गहरा गया है।
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सीएमओ ने पांच सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी (सीएचओ) को आईसीयू से उनके मूल कार्य स्थल भेजने के आदेश दिए हैं जबकि इससे पहले एक स्टाफ नर्स को भी उनकी मूल जगह भेजा जा चुका है।
जिला अस्पताल में पिछले साल अगस्त में आईसीयू का उद्घाटन हुआ था लेकिन डीएम विनीत तोमर के सख्त रवैये के बाद इसका संचालन इस साल मई से शुरू हो सका था। डीएम ने इसके संचालन में लापरवाही पर कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी थी।
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तब आईसीयू के सृजित पदों पर तैनाती न होने के बावजूद इसका संचालन ठीक तरह से हुआ। विभिन्न अस्पतालों से चार डॉक्टर, नौ सीएचओ, चार एएनएम आईसीयू से संबद्ध किए गए। तबसे यह आईसीयू चार महीने तक बेहतर चला था लेकिन अब फिर कार्मिकों की कमी होने लगी है।
सीएमओ डॉ. आरपी खंडूरी ने एनएचएम के काम पर असर पड़ने के चलते पांच सीएचओ को उनके मूल तैनाती स्थलों पर जाने के आदेश दिए हैं। उनके कार्यमुक्त होने से आईसीयू में सिर्फ तीन सीएचओ ही बच जाएंगे। इससे 24 घंटे सेवा देने वाले आईसीयू के संचालन पर असर पड़ेगा।
आईसीयू में तीन माह में 85 मरीजों को मिला इलाज
चंपावत। जिला अस्पताल का आईसीयू ने कोरोना के दौर और उसके बाद बेहतरीन सेवा दी है। तीन महीनों में यहां 85 मरीजों का इलाज हुआ जबकि सिर्फ 11 मरीजों को ही यहां से सुशीला तिवारी अस्पताल हल्द्वानी रेफर किया गया लेकिन अब इसके सम्मुख फिर गंभीर चुनौती की आशंका है। संवाद
पांच सीएचओ को कार्यमुक्त करने के आदेश से आईसीयू में स्टाफ की भारी कमी हो जाएगी। इस वजह से आईसीयू के संचालन पर असर पड़ेगा। इसके मद्देनजर पत्र भेज डीएम से आईसीयू में स्टाफ के लिए अनुरोध किया जाएगा।
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- डॉ. एचएस ऐरी, पीएमएस, जिला अस्पताल, चंपावत।
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