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अभियान:आदर्श स्कूलों का ये कैसा आदर्श

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लोहाघाट विकासखंड के पुलहिंडोला का आदर्श राजकीय इंटर कॉलेज भवन। - फोटो : CHAMPAWAT
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लोहाघाट विकासखंड के गुमदेश क्षेत्र के राजकीय इंटर कॉलेज को आदर्श कॉलेज का दर्जा दिया गया है लेकिन ग्रामीण क्षेत्र के इस विद्यालय की तस्वीर आदर्श नहीं है। इस विद्यालय में न महत्वपूर्ण विषयों के शिक्षक हैं और न ही आधारभूत ढांचे के हाल ठीक हैं।
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छात्र संख्या भी लगातार कम हो रही है। यह जिले का एकमात्र ऐसा विद्यालय है जहां इंटर में कृषि विषय है लेकिन कृषि विषय सृजित होने के बाद अभी तक प्रवक्ता की नियुक्ति नहीं की गई है।
प्रवक्ता नहीं होने से कृषि विषय में 12वीं में 8 तो 11वीं कक्षा में महज 2 छात्र हैं। इन छात्रों को हाईस्कूल के कृषि शिक्षक राजेश कुमार गुप्ता पढ़ा रहे हैं। गुमदेश क्षेत्र का सबसे पुराना पुलहिंडोला का जीआईसी करीब 250 नाली जमीन में फैला है।
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भवन के हाल भी ठीक हैं। एक साल से प्रधानाचार्यविहीन चल रहे इस आदर्श स्कूल में गणित, भौतिक विज्ञान, समाजशास्त्र, अर्थशास्त्र और कृषि विषय के प्रवक्ता के पद खाली हैं।
चार साल पहले जीआईसी को आदर्श स्कूल का दर्जा दिया गया तब यहां की छात्र संख्या 401 थी लेकिन अब छात्रों की संख्या 300 है। प्रभारी प्रधानाचार्य सुधाकर तिवारी का कहना है कि प्रवक्ताओं की कमी के अलावा विविल और चमदेवल में इंटर कॉलेज खुलने से छात्र संख्या कम हो गई।
प्रवक्ताओं की कमी से इस बार गणित में ग्यारहवीं कक्षा में एक भी छात्र ने प्रवेश नहीं लिया। जबकि बारहवीं में महज दो छात्र हैं। इंटर विज्ञान में प्रयोगशाला के हाल भी ठीक नहीं है। सभी छात्रों के लिए फर्नीचर भी उपलब्ध नहीं है। करीब 150 छात्रों के लिए कुर्सी की कमी है।
तीन दिन में एक बार मिलता है पानी
लोहाघाट (चंपावत)। पुलहिंडोला जीआईसी में बुनियादी सुविधाओं की भी कमी है। 230 नाली से अधिक एरिया में फैले जीआईसी परिसर में भी शिक्षकों के लिए आवास नहीं बन सके हैं। यहां तक कि इस आदर्श विद्यालय में छात्रों और शिक्षकों के लिए पर्याप्त पेयजल तक नहीं है। प्रभारी प्रधानाचार्य सुधाकर तिवारी बताते हैं कि कॉलेज में पाइप लाइन तो है लेकिन इसमें सप्ताह में बमुश्किल दो बार ही पानी आता है। इसके अलावा एक हैंडपंप है।
आदर्श जीआईसी पुलहिंडोला में प्रवक्ताओं की कमी से पढ़ाई प्रभावित हो रही है। प्रवक्ताओं की कमी को दूर करने के लिए निदेशालय से आग्रह किया जाएगा। फर्नीचर और अन्य बुनियादी संसाधनों की कमी को दूर करने के लिए बजट की मांग की जा रही है।
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आरसी पुरोहित, जिला शिक्षाधिकारी, चंपावत।
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