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रीठा साहिब को छह माह में मिल जाएगी बाढ़ से निजात

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रीठा साहिब में बाढ़ सुरक्षा योजना के तहत बन रही दीवार। फोटो: संवाद न्यूज एजेंसी - फोटो : CHAMPAWAT
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चंपावत। लधिया घाटी के रीठा साहिब को अगले साल फरवरी तक लधिया और रतिया नदी के उफान में आने से होने वाले नुकसान से निजात मिल जाएगी। यहां चल रहा बाढ़ सुरक्षा का काम इन दिनों तेजी से चल रहा है। 200 मीटर सुरक्षा दीवार बना ली गई है। योजना के पूरा होने से गुरुद्वारे के लिए विख्यात रीठा साहिब के तटवर्ती क्षेत्रों को बाढ़ के खतरे से मुक्ति मिलेगी।
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अक्तूबर 2019 में तत्कालीन मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने रीठा साहिब की सुरक्षा के लिए बाढ़ योजना का एलान किया था। इस साल के शुरू में सिंचाई विभाग ने बाकायदा काम भी शुरू कर दिया।
सिंचाई विभाग के ईई बीबी पांडेय ने बताया कि 576 मीटर की सुरक्षा दीवार में से 200 मीटर दीवार बना ली गई है। 366.52 लाख रुपये की लागत वाली इस योजना में से मिले 133.50 लाख रुपये का उपयोग किया जा चुका है। ईई ने बताया कि अगले साल फरवरी तक इस योजना को पूरा कर लिया जाएगा।
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वनरावत गांव खिरद्वारी का 40 हेक्टेयर क्षेत्र सिंचित होगा
चंपवत। जिले के इकलौते वनरावत गांव खिरद्वारी में 98 लाख रुपये से बन रही सौर ऊर्जा लिफ्ट सिंचाई योजना इसी वित्त वर्ष में पूरी हो जाएगी। इससे खिरद्वारी क्षेत्र में सिंचाई की कमी दूर होने के साथ खेत लहलहा उठेगी। साथ ही सौर ऊर्जा से नलकूप चलाने से किसानों के खेत बिजली के बिल और डीजल में होने वाले खर्च के बगैर लहलहाएंगे।
उपजाऊ जमीन होने के बावजूद खिरद्वारी गांव में सिंचाई की व्यवस्था नहीं है। वित्त वर्ष 2021-22 की जिला योजना से खिरद्वारी केलिए सौर ऊर्जा सिंचाई योजना मंजूर की गई थी। अब निविदा प्रक्रिया पूरी होने के साथ ही काम शुरू हो जाएगा। इससे 40 हेक्टेयर क्षेत्र सिंचित होगा।
टनकपुर का नलकूप खंड इस काम को एक साल में पूरा करेगा। 98 लाख रुपये की इस योजना के लिए जिला प्लान में 86.12 लाख रुपये रखे गए हैं। सिंचाई के लिए 35 किलोवाट क्षमता के सौर पैनल संयंत्र लगाए जाएंगे। नलकूप खंड टनकपुर के जेई जितेंद्र कुमार का कहना है कि सौर ऊर्जा सिंचाई योजना को अगले साल मार्च तक पूरा करा लिया जाएगा।
फिलहाल आसमान पर टकटकी लगाते हैं किसान
चंपावत। जिले में सिंचाई की सुविधा बदतर हाल में है। महज 17 प्रतिशत खेतों में ही सिंचाई की व्यवस्था है। सबसे ज्यादा बुरे हाल पर्वतीय क्षेत्रों के हैं। सिंचाई के साधनों की कमी किसानों की मेहनत पर पानी फेर रही है।
कृषि विभाग के आंकड़ों के मुताबिक जिले में 16610 हेक्टेयर क्षेत्र में से बमुश्किल 2825 हेक्टेयर में ही सिंचाई की सुविधा है। सिंचाई के साधनों की कमी किसान की मेहनत पर भारी पड़ रही है। किसानों का कहना है कि सिंचाई की सुविधा के बगैर 2022 में आय दोगुनी करना असंभव होगा।
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