सतीश जोशी ‘सत्तू’
चंपावत। उद्यान विभाग जिले में केसर की खुशबूदार खेती के लिए किसानों को प्रोत्साहित कर रहा है। पायलट प्रोजेक्ट के तहत विभाग ने लोहाघाट विकासखंड के खेतीखान क्षेत्र को इसके लिए चयनित किया है। वहां के किसानों को केसर का बीज बांटा जा रहा है। इसे कश्मीर के पंपोर स्थित केसर अनुसंधान केंद्र से मंगाया गया है।
जिला उद्यान अधिकारी टीएन पांडेय ने बताया कि जिले के पर्वतीय हिस्से की जलवायु केसर की खेती के लिए उपयुक्त है। इसलिए विभाग ने यहां केसर की खेती करने की योजना बनाई है। कश्मीर घाटी के पंपोर से मंगाए गए केसर के बीज खेतीखान क्षेत्र में रोपे गए हैं। अक्तूबर से दिसंबर के बीच इनमें फूल खिलेंगे।
दूसरे चरण में जिले के सभी चारों विकासखंडों में केसर की खेती की जाएगी। इसके लिए उद्यान विभाग ने किसानों की चयन प्रक्रिया शुरू कर दी है। हर चयनित किसान को केसर के 15-15 किलो बीज दिए जाएंगे। मसाले के रूप में प्रयोग होने वाले केसर का दाम करीब तीन लाख रुपये प्रति किलो है। परंपरागत खेती के बजाय केसर उगाकर क्षेत्र के किसान आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर हो सकते हैं।
कैंसर जैसी घातक बीमारी से बचाने में सहायक है केसर
चंपावत। केसर अनिद्रा रोग दूर करने और कैंसर जैसी घातक बीमारी से बचाने में भी सहायक है। वनस्पति विज्ञानी डॉ. प्रकाश चंद्र के अनुसार केसर का वानस्पतिक नाम क्रोकस सैटाइवस है। केसर का सेवन दिमाग के लिए लाभदायक है। इसका प्रयोग पाचन शक्ति को भी ठीक करता है।