टनकपुर (चंपावत)। डिग्री काॅलेज परिसर में सोमवार को ऐपण व्ययसाय पर चर्चा की गई। कॅरिअर काउंसलिंग के तहत ऐपण को व्यावसायिक रूप में अपनाने पर जोर दिया गया।
मुख्य अतिथि एवं विशेषज्ञ अनुपमा और बसंत ने कहा कि देश-विदेश में ऐपण कला के उत्पादों की काफी मांग है। ऐपण प्रदेश की प्राचीन लोक कला है। यह अब खास मौकों पर घर के आंगन, देहरी और दीवारों की शोभा बढ़ाने तक सीमित नहीं रह गई है। यह कला पारंपरिक शौक से बाहर एक व्यावसायिक रूप धारण कर चुकी है। ऐपण के व्यवसाय ने कई कला पसंद युवाओं के लिए रोजगार के दरवाजे खोल दिए हैं।
स्टेशनरी, फाइल कवर, फोल्डर पेन स्टैंड, शूट, दुपट्टा, बैग, पूजा की थाली, नेम प्लेट, चाबी का छल्ला समेत कई उत्पादों को ऐपण प्रिंट से तैयार किया जा रहा है। ऐपण में रुचि लेने वाले युवा इसको व्यवसाय के रूप में अपना सकते हैं।
कार्यक्रम की अध्यक्षता प्राचार्य डाॅ. अनुपमा तिवारी और संचालन डा. सुमन कुमारी ने किया। वहां डाॅ. एसके कटियार, डाॅ. एसएस चौहान, डाॅ. पंकज उप्रेती, डाॅ. सुषमा मक्कड़, डाॅ. ब्रह्मानंद, डाॅ. किरन, डाॅ. होशियार सिंह, डाॅ. डीवी सिंह आदि मौजूद रहे।