शिशु को दवा पिलाती सील बड़यूड़ी की दिव्यांग आशा कार्यकर्ता निर्मला।
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चंपावत। अमोड़ी निवासी प्रकाश भट्ट की दोनों आंखाें की रोशनी जा चुकी है। इस कारण वह नौवीं से आगे की पढ़ाई नहीं कर सके। विपरीत परिस्थितियों में भी उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और बच्चों को पढ़ाने की सोची। वर्तमान में वह गांव के कुछ बच्चों को मौखिक रूप से पढ़ा रहे हैं। इससे उनका जेब खर्च निकल जाता है।
30 साल के प्रकाश की एक आंख बचपन से ही खराब थी और दूसरी आंख से 2007 में दिखना बंद हो गया। एक आंख के सहारे उन्होंने नौंवी कक्षा तक पढ़ाई की लेकिन पूरी तरह दिखना बंद होने के बाद आगे की पढ़ाई छूट गई। 2004 में पिता हरिदत्त भट्ट का साया उठने और मां त्रिलोकी देवी (58) के कैंसर पीड़ित होने से परिवार की मुश्किलें और बढ़ गईं। दो भाई और दो बहनों में कमाने वाला एक ही भाई है। बच्चों को पढ़ाकर और दिव्यांग पेंशन के रूप में मिलने वाले 1200 रुपये से वह भाई का बोझ किसी तरह कम करने का प्रयास कर रहे हैं। प्रकाश बताते हैं कि दिव्यांगता की वजह से उन्होंने विवाह भी नहीं किया। उनके पास न राशनकार्ड है और न ही घर। प्रधान से विधायक तक गुहार लगाई लेकिन कहीं से समाधान नहीं हुआ।
दोनों हाथ छोटे लेकिन निर्मला का हौसला बड़ा
लोहाघाट (चंपावत)। हाथों की दिव्यांगता के बावजूद हिम्मत न हारते हुए सील बडय़ूड़ी गांव की निर्मला ने मिसाल पेश की है। जन्म से ही दोनों हाथों से दिव्यांग निर्मला अपने बुजुर्ग मां-बाप का पालनपोषण पूरी संजीदगी से कर रही है। दिव्यांगता और समाज सेवा के मद्देनजर विवाह नहीं करने का फैसला है।
35 साल की दिव्यांग निर्मला काम के सिलसिले में सील बडयूड़ी तक आठ किलोमीटर पैदल जाने के बाद वाहन से बाराकोट पहुंचती है। 360 रुपये आने-जाने में खर्च आता है। पैदल और जंगल के रास्ते में वह गर्भवती महिलाओं को डोली की मदद से भी स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाती हैं। खुद सीएमओ डॉ. केके अग्रवाल का मानना है कि निर्मला ने कठिन हालातों में कोविड में उत्कृष्ट काम किया।
जिले में 3092 दिव्यांगों को मिलती है पेंशन
चंपावत। जिले में समाज कल्याण विभाग की ओर से 3092 दिव्यांगों को दिव्यांग पेंशन का लाभ दिया जा रहा है। जिला समाज कल्याण अधिकारी आरएस सामंत का कहना है कि सभी सरकारी कार्यालयों में दिव्यांगों की सुविधा के लिए रैंपों का निर्माण करने के साथ ही ट्राई साइकिलें उपलब्ध कराई गई हैं। इसके अलावा जिला अस्पताल में दिव्यांग पुनर्वास केंद्र प्रकोष्ठ का संचालन किया जा रहा है।
अमोड़ी के नेत्रहीन प्रकाश भट्ट।- फोटो : CHAMPAWAT