लोहाघाट (चंपावत)। पिछले माह हुई भारी बारिश के बाद किसानों के खेतों, फसलों, पेड़, पौधों को हुए नुकसान का अधिकतर लोगों को मुआवजा नहीं मिल सका है। मौसम की मार ने किसानों की कमर तोड़ कर रख दी है। किसानों के फसलों से भरे खेत जमींदोज हो गए, वहीं पेड़, पौधों, सब्जियों को काफी नुकसान पहुंचा।
किसानों ने अपने खेतों में मडुवा, मक्का, मिर्च, राई, पालक, मेथी, शिमला मिर्च, बैगन, बंदगोभी के साथ मत्स्य पालन किया था, जो भारी बारिश की भेंट चढ़ गया। बारिश के कारण जानवरों के लिए काटी गई घास बहने और खेत धंसने से किसानों को काफी नुकसान हुआ है। किसानों ने उन्हें हुए नुकसान का मुआवजा न मिलने पर नाराजगी जताई है।
किसानों का कहना था कि उद्यान विभाग और राजस्व विभाग ने नुकसान का निरीक्षण तो कर लिया है, लेकिन उन्हें मुआवजा नहीं मिल पाया है। मुख्य कृषि अधिकारी राजेंद्र उप्रेती का कहना है कि प्रारंभिक तौर पर बारिश से जिले में करीब 35-40 हेक्टेयर भूमि को नुकसान होने की सूचनाएं मिलीं हैं। नुकसान का आकलन किया जा रहा है।
आपदा के तय मानक
खेतों में मलबा भरने पर 12200 रुपये प्रति हेक्टेयर, जमीन कटने पर 37500 प्रति हेक्टेयर, 50 फीसदी से अधिक नुकसान पर बीज, खाद, पानी के लिए 6800 प्रति हेक्टेयर, सिंचित भूमि में 13500, असिंचित भूमि में 6800 प्रति हेक्टेयर मुआवजे का मानक है।
भारी बारिश के कारण मडुवा, मक्का की खेती से लहलहाते 12 नाली खेत जमींदोज हो गए हैं। वहीं 100-100 वर्गमीटर के दो मछली के तालाब क्षतिग्रस्त हुए। करीब डेढ़ क्विंटल मछलियां बह गईं लेकिन मुआवजा नहीं मिला है। - रघुवर दत्त मुरारी, किसान, डुंगरी फर्त्याल।
खेतों में बोया गया पालक, मेथी, राई, मूली की फसल बर्बाद हो गई है। पिछले वर्ष तक इस सीजन में 20 से 30 हजार रुपये सब्जियां बेचकर कमा लेते थे, बारिश ने किसानों की कमर तोड़ कर रख दी है। - बलदेव राय, किसान, रायनगर चौड़ी।
भारी बारिश के कारण नाशपाती के चार फलदार वृक्ष आंगन सहित बह गए। लहसुन, हरी सब्जियों सहित खेत बह गए लेकिन कोई मुआवजा नहीं मिल पाया है। उद्यान विभाग के अधिकारी क्षति का आकलन कर ले गए हैं। - मिलाप सिंह, किसान डुंगरी फर्त्याल।
बारिश के कारण किसानों को हुए नुकसान का स्थलीय निरीक्षण करने के लिए राजस्व, कृषि, उद्यान विभाग की टीमों को निर्देश दिए हैं। जिन किसानों को नुकसान हुआ है, उन्हें एसडीआरएफ मद से मुआवजा दिया जाएगा। जिन किसानों ने अपनी भूमि, फसलों, पेड़, पौधों को हुई क्षति की सूचना प्रशासन को नहीं दी है, वह स्थानीय पटवारी या राजस्व विभाग में नुकसान की सूचना दें। ताकि उन्हें हुए नुकसान का नियमानुसार मुआवजा बांटा जा सके।
- केएन गोस्वामी, एसडीएम, लोहाघाट।
विगत दिवस हुई भारी बारिश से बिशुंग क्षेत्र में मलबे से पटे खेत।- फोटो : LOHAGHAT