चंपावत। अब दुग्ध उत्पादकों को दूध की कीमतों को लेकर किसी तरह संशय नहीं रहेगा। उन्हें गुणवत्ता के हिसाब से अपने दूध का दाम मिल सकेगा। ये संभव हो रहा है डेटा प्रोसेसिंग मिल्क केल्कुलेटिंग यूनिट (डीपीएमसीयू) मशीन से। इस मशीन को जिले की 15 दुग्ध संघ में लगाया जा चुका है। एक साल के भीतर इसे कई अन्य समितियों में भी लगाया जाएगा।
चंपावत जिले में दूध का उत्पादन खूब होता है। 176 दुग्ध संघ समितियों के 3500 दुग्ध उत्पादकों के जरिए रोजाना तकरीबन 9000 लीटर दूध एकत्र होता है, लेकिन इस दूध की कीमत को लेकर उत्पादकों में अक्सर संशय रहता था। समितियों में मैन्युल तरीके से दूध की गुणवत्ता मापन से अक्सर खामियों होती थी।
खासकर अधिक गुणवत्ता वाले दूध उत्पादक को नुकसान होता था, पर अब उन्हें इससे निजात मिल सकेगी। दुग्ध संघ प्रबंधक राजेश मेहता ने बताया कि जिले में 15 दुग्ध समितियों में डीपीएमसीयू मशीन पिछले सप्ताह लगाई जा चुकी है। सुयालखर्क, मुड़ियानी, ललुवापानी, पुनावे, मल्ला मानर, डिंगडई, हरिपुरा, गौड़ी, बचकड़िया, पाटन, चौड़ाराजपुरा, मोत्युराज, दुध पोखरा समिति के अलावा किमतोली, चंपावत दुग्ध संघ प्लांट में इस मशीन को लगाया गया है।
मशीन लगने वाली सुयालखर्क दुग्ध समिति के सचिव कैलाश चंद्र जोशी का कहना है कि मशीन से दुग्ध उत्पादक फैट, सॉलिड नॉट फैट (एसएनएफ), दूध की मात्रा, मिलने वाली कीमत तुरंत जानी जा सकेगी। इसकी एक स्लिप समिति में दूध बेचने वाले को हाथोंहाथ दी जा रही है। इस व्यवस्था से पारदर्शिता, दूध का सही दाम उत्पादकों को मिल सकेगा।