सीएम धामी की जीत के बाद सांसद अजय टम्टा को मिठाई खिलाते भाजपा कार्यकर्ता। संवाद न्यूज एजेंसी
- फोटो : CHAMPAWAT
चंपावत। 10 मार्च और तीन जून। ये महज दो तारीख भर नहीं हैं... इन 85 दिनों में राजनीति ने ऐसी करवट बदली कि सत्ता की धुरी खटीमा से चंपावत शिफ्ट हो गई। 10 मार्च को खटीमा में आए नतीजे की कसक और कड़वाहट को बाल मिठाई के लिए मशहूर चंपावत ने मिठास में बदल दिया। विधानसभा पहुंचने के लिए चंपावत से भाजपा प्रत्याशी के रूप में मैदान में उतरे मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को चंपावत के लोगों ने हाथोंहाथ लिया। वह भी ऐसे कि कई रिकॉर्ड ध्वस्त हुए और कीर्तिमानों की नई इबारत लिखी गई। कुल पड़े वोटों का 92.62 प्रतिशत (62898 में से 58258 वोट) भाजपा को मिले। फरवरी में हुए विस चुनाव में दो तिहाई सीट लाने वाली भाजपा के प्रदेश के सबसे बड़े चेहरे मुख्यमंत्री धामी 6579 वोटों से पराजित हो गए थे। शुक्रवार को रिकॉर्ड जीत ने हार की उस कसक को दूर किया।
ये रिकॉर्ड ध्वस्त हुए
1. कांग्रेस की जमानत जब्त हुई। उत्तराखंड विधानसभा चुनाव में पहली बार किसी राष्ट्रीय दल के प्रत्याशी को इस कदर शर्मनाक हार झेलनी पड़ी।
2. चंपावत सीट से कांग्रेस का अब तक का यह सबसे कमजोर प्रदर्शन रहा। इस बार कांग्रेस को महज 3233 वोट मिले। इससे पहले उसे सबसे कम 8380 वोट मिले थे।
3. भाजपा ने चंपावत सीट से सबसे अधिक वोट 55025 से जीत दर्ज की। इससे पहले 2017 में कैलाश गहतोड़ी ने 17360 वोटों से विजय हासिल की थी।
4. चंपावत विस सीट पर अब तक हुए पांचों विस चुनावों में कुल मिलाकर जीत का अंतर 37076 वोट का रहा। उपचुनाव में सीएम पांचों चुनावों के जीत के योग से बढ़ी (55025) जीत हासिल की थी।
5. उत्तराखंड में चार मुख्यमंत्रियों ने उपचुनाव लड़ा। उपचुनाव लड़ने वाले पांचवें मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सबसे ज्यादा वोटों से जीत दर्ज की। इससे पूर्व 2012 में सितारगंज सीट से विजय बहुगुणा 39966 वोटों से विजयी रहे थे।
6. उत्तराखंड की पांचवीं विधानसभा में चंपावत सीट से मिली 55025 वोटों की सबसे बड़ी जीत है। इससे पहले फरवरी में रायपुर सीट से भाजपा के उमेश शर्मा काऊ (65756) ने कांग्रेस के हीरा सिंह बिष्ट (35704) को 30052 वोटों से हराया था।
महाजीत के सूत्रधार बने कैलाश गहतोड़ी
चंपावत। चंपावत उपचुनाव की रिकॉर्डतोड़ जीत का सबसे बड़ा श्रेय मुख्यमंत्री के लिए विधानसभा सीट छोड़ने वाले कैलाश गहतोड़ी को जाता है। गहतोड़ी ने खुद 2017 में 17360 वोटों के बड़े अंतर से जीत हासिल की थी। इस बार भी उन्हें 5304 वोटों से विजय मिल थी। उपचुनाव के लिए उन्होंने न केवल 40 से अधिक सभाएं और रैली कीं बल्कि सूझबूझ से भाजपा में बेहतरीन समन्वय बनाया। स्थानीय कार्यकर्ताओं को प्रदेश संगठन और मंत्रियों के बीच तालमेल में भी उनका अहम रोल रहा।