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मां पूर्णागिरि धाम की पहाड़ी के ट्रीटमेंट में स्टीमेट बजट बना बाधक

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मां पूर्णागिरि धाम के मुख्य मंदिर की पहाड़ी के नीचे की तरफ से ली गई तस्वीर। (फाइल फोटो) - फोटो : TANAKPUR
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मां पूर्णागिरि धाम की पहाड़ी के जल्द ट्रीटमेंट की उम्मीद पर कार्य के स्टीमेट रेट ने ग्रहण लगा दिया है। कम स्टीमेट रेट के कारण ट्रीटमेंट कार्य का टेंडर आवंटित नहीं हो पा रहा है।
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तीन बार लगाए गए टेंडरों में ठेकेदार कंपनियों ने स्टीमेट रेट से अधिक धनराशि भरी है, जिस कारण तीनों बार टेंडर रद्द करने पड़े हैं। अब कार्यदायी विभाग लोनिवि की वर्ल्ड बैंक इकाई चौथी बार रि-टेंडर की कवायद में जुटी है। टेंडर का आवंटन न होने से फिलहाल पहाड़ी का जल्द ट्रीटमेंट होने के आसार कम नजर आ रहे हैं।
मां पूर्णागिरि धाम के मुख्य मंदिर की पहाड़ी में सालों से पड़ी दरार लगातार बढ़ती जा रही है। करीब 11 साल पहले 2008 में पहाड़ी में दरार का पता चला। भू-वैज्ञानिकों की सलाह पर पिछले एक दशक से पहाड़ी के ट्रीटमेंट की कवायद चल रही है, लेकिन अब तक ट्रीटमेंट शुरू नहीं हो पाया है। विभागों द्वारा ट्रीटमेंट में असमर्थता जताने से कई सालों तक बजट इधर से उधर विभागों में ट्रासंफर होता रहा। कार्य की लागत भी बढ़ती रही।
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अब वर्ल्ड बैंक द्वारा काम अपने हाथ में लिया गया है। इसके लिए करीब नौ करोड़ रुपये की धनराशि कार्य के लिए स्वीकृत हुई है। वाप्कास कंपनी से पहाड़ी के ट्रीटमेंट की डीपीआर तैयार कराने के बाद वर्ल्ड बैंक तीन बार टेंडर निकाल चुका है, लेकिन ठेका कंपनियां स्टीमेट का बजट कम होने के कारण ठेका लेने से पीछे हट रही हैं। बताया गया कि गत वर्ष अक्तूबर के अंत में तीसरी बार निकाले गए टेंडर में नोएडा की एक कंस्ट्रक्शन कंपनी ने स्टीमेट बजट से करीब 108 गुना अधिक रेट भरे हैं, जिससे इसका आवंटन नहीं हो पाया है।
टेंडर में हिस्सा ले रही ठेकेदार कंपनियां स्टीमेट रेट के बजट में काम करने को तैयार नहीं है, जिस कारण टेंडर का आवंटन नहीं हो पा रहा है। स्थिति से जिलाधिकारी को भी अवगत कराया गया है। जल्द ही बजट और टेंडर आवंटन पर निर्णय लिया जाएगा। -श्याम शुभम, एई वर्ल्ड बैंक चंपावत।
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