चंपावत। स्वर्गीय जयदत्त चौड़ाकोटी आजादी के दौर में करीब 8 माह तक जेल रहे। उनकी मूर्ति भी इलाके के छह अन्य सेनानियों के साथ धुरा में बने स्वतंत्रता संग्राम सेनानी स्मारक में बनाई गई है। लेकिन फिर भी सरकार उन्हें स्वतंत्रता संग्राम सेनानी नहीं मानती है। जानकारों का कहना है कि भले ही शासन की नजर में वे अभी सेनानी न हो, मगर क्षेत्र के लोग उनके योगदान को न केवल जानते हैं, बल्कि उन्हें सेनानी मानते भी हैं।
सूखीढांग-धुरा क्षेत्र की पहचान सात सेनानियों के नाम से हैं। यहां के पंडित रामचंद्र चौड़ाकोटी, बेनीराम चौड़ाकोटी, पदमादत्त चौड़ाकोटी, जयदत्त चौड़ाकोटी, चूड़ामणि जोशी, चिंतामणि जोशी और बची सिंह राना ने देश की आजादी के लिए अंग्रेजों के खिलाफ मोर्चा खोला था। लेकिन इनमें से छह सेनानियों को तो विधिवत स्वतंत्रता संग्राम सेनानी का ओहदा मिल गया। मगर एक सेनानी जयदत्त चौड़ाकोटी को सेनानी घोषित नहीं किया गया। जबकि स्वर्गीय जयदत्त ने आजादी की लड़ाई में 238 दिनों तक जेल काटी।
सूचना अधिकार से मिली जानकारी के मुताबिक जयदत्त ने 28 सितंबर 1942 से 20 नवंबर 1942 तक अल्मोड़ा कारागार में रहे। 21 नवंबर 1942 से 24 मई 1943 तक उन्हें बरेली के जिला जेल में रखा गया।
अंग्रेजों ने उनके खिलाफ डिफेंस ऑफ इंडिया रूल्स (डीआईआर) की धारा 38 (5) के तहत मुकदमा चलाया था। इस धारा का उपयोग आमतौर पर अंग्रेजों के खिलाफ काम करने वालों पर किया जाता था। स्वतंत्रता संग्राम सेनानी उत्तराधिकारी संगठन के जिलाध्यक्ष महेश चंद्र चौड़ाकोटी बताते हैं कि अन्य सेनानियों के साथ जयदत्त ने भी विभिन्न अभियानों में हिस्सा लिया था। भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान उन्होंने देवीधुरा में प्रदर्शन किया। डांडा, बुड़म आदि दूरदराज के इलाकों में जन-जागृति की। उन्हें छह अन्य सेनानियों के साथ सजा भी सुनाई गई। इसके चलते धुरा में नवंबर 2013 में बने स्वतंत्रता संग्राम सेनानी स्मारक में जयदत्त सहित सभी सात सेनानियों की मूर्ति स्थापित की गई। इस स्मारक का उद्घाटन तत्कालीन मंडलायुक्त एएस नयाल ने किया था।
कोट....
जयदत्त के स्वतंत्रता संग्राम सेनानी होने के परिजनों के दावे का परीक्षण कराया जा रहा है। अल्मोड़ा कारागार और बरेली की जिला जेल को पत्र लिख जानकारी मांगी गई है। इसके बाद जो कार्यवाही जरूरी होगी, की जाएगी।
अनिल कुमार चन्याल,
उप जिला मजिस्ट्रेट, टनकपुर।
आजादी के छह माह बाद हुआ था निधन
जयदत्त चौड़ाकोटी का आजादी के छह महीने बाद निधन हो गया था। जनवरी 1913 में जन्मे जयदत्त का फरवरी 1948 में निधन हो गया। और एक साल बाद 1949 में उनकी धर्मपत्नी की मौत हो गई। 2006 में उनके बेटे की मौत हुई। पिछले साल सितंबर में स्वतंत्रता संग्राम सेनानी कुटुंब पेंशन योजना के शासनादेश के बाद सेनानी जयदत्त की बहू जानकी देवी ने इस मसले को स्वतंत्रता सेनानी उत्तराधिकारी संगठन के जरिए उठाया। एक अगस्त को टनकपुर में हुए तहसील दिवस में प्रशासन से जयदत्त चौड़ाकोटी को स्वतंत्रता सेनानी का दर्जा देते हुए सभी सुविधाएं देने की मांग की गई हैं।