खनन खुलने से शारदा के डाउन स्ट्रीम निकासी गेट में बढ़ी चलह-पहल। संवाद
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टनकपुर (चंपावत)। शारदा नदी के डाउन स्ट्रीम में शुक्रवार से खनन शुरू हो गया है। पहले दिन 256 वाहनों से एक हजार घन मीटर से अधिक खनिज की निकासी हुई है। खनन खुलने से अब तक बेकाम बैठे खनन कारोबारी खासे खुश हैं। फिलहाल डाउन स्ट्रीम के पहले निकासी गेट के तीन तौल कांटों से निकासी हो रही है। शनिवार से कालाझाला में नवनिर्मित गेट से भी निकासी शुरू कर दी जाएगी।
वन निगम के खनन प्रभाग ने शारदा के खनन गेट गत 15 दिसंबर को खोल दिए थे, लेकिन स्टोन क्रशर स्वामियों की हड़ताल के चलते खनिज की निकासी शुरू नहीं हो पाई थी। कारोबारियों ने उद्घाटन के दो दिन बाद शुक्रवार की सुबह से खनिज निकासी शुरू की है। वन निगम के खनन प्रबंधक हरीश पाल ने बताया कि फिलहाल शासन से 1.80 लाख घन मीटर खनिज निकासी की अनुमति मिली है, जो फाइनल सर्वे के बाद और बढ़ने की उम्मीद है। उन्होंने बताया कि पहले दिन खनन में पंजीकृत 256 वाहनों से करीब एक हजार घन मीटर से अधिक खनिज की निकासी हुई है, जबकि खनन के लिए अब तक 425 वाहनों का पंजीकरण हो चुका है। उन्होंने बताया कि निकासी मार्ग के मरम्मत कार्य के चलते फिलहाल पहले दिन कालाझाला में नव निर्मित निकासी गेट नहीं खोला गया है। शनिवार से कालाझाला गेट से भी निकासी शुरू करा दी जाएगी।
बैराज प्रवेश शुल्क को लेकर विवाद से देर में शुरू हुई निकासी
शारदा खनन में लगे वाहनों से एनएचपीसी द्वारा लिए जाने वाले बैराज प्रवेश शुल्क की वसूली को लेकर पैदा हुए विवाद से पहले दिन खनिज निकासी देर से शुरू हो पाई। एनएचपीसी द्वारा प्रति दिन प्रति वाहन 70 रुपये बैराज प्रवेश शुल्क वसूला जाता है लेकिन कोरोना काल के कारण एनएचपीसी ने गत वर्ष एसडीएम हिमांशु कफल्टिया की पहल पर यह शुल्क माफ कर दिया था। इस बार बैराज प्रवेश शुल्क को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं होने से वाहन सुबह 10 बजे तक बैराज में प्रवेश नहीं कर पाए। बाद में एनएचपीसी प्रशासन ने निर्णय के लिए दो दिन का वक्त देकर वाहनों को प्रवेश करने दिया।
शारदा और राजस्व पट्टों में रायल्टी की दरों में भारी अंतर से कारोबारियों में मायूसी
खनन खुलने से कारोबारी खुश तो है लेकिन शारदा खनन और राजस्व भूमि के पट्टों से खनिज निकासी की दर को लेकर उनमें मायूसी भी है। मां शारदा शक्तिमान ट्रक खनन समिति के अध्यक्ष आनंद सिंह महर अन्नी का कहना है कि शारदा खनन में उन्हें 27 रुपये प्रति क्विंटल रॉयल्टी देनी पड़ रही है, जबकि राजस्व भूमि के पट्टों में होने वाले खनन में रायल्टी की दर पांच रुपये प्रति क्विंटल है। रॉयल्टी के दरों में इस भारी अंतर के कारण शारदा में खनन के कारोबार पर हर साल विपरीत असर पड़ता है। उन्होंने रॉयल्टी की दरों में इस भारी अंतर को कम किए जाने की मांग उठाई है।