चमोली के सुतोल गांव के पैदल रास्ते के सुधारीकरण कार्य में जुटीं ग्रामीण महिलाएं।
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एक सप्ताह से बंद सुतोल ग्राम पंचायत के दो गांवों का मार्ग खोलने के लिए जब प्रशासन से कोई मदद नहीं मिली तो महिलाओं ने श्रमदान कर स्वयं ही रास्ता खोल लिया। यही नहीं उन्होंने पैदल रास्ते की कई जगहों पर मरम्मत भी की। अब मार्ग पर आवाजाही सुचारु हो गई है।
घाट ब्लॉक के सुदूरवर्ती ग्राम पंचायत सुतोल में 150 परिवार रहते हैं, जिनमें से 25 परिवार तातड़ा और 28 परिवार सुगढ़ में रहते हैं। सुतोल गांव तक तो सड़क की सुविधा है, लेकिन तातड़ा और सुगढ़ के ग्रामीणों को अपने गंतव्य तक जाने के लिए करीब पांच किलोमीटर की पैदल दूरी नापनी पड़ती है। बीते दिनों क्षेत्र में हुई भारी बारिश से पांच किमी पैदल रास्ता जगह-जगह क्षतिग्रस्त हो गया। भूस्खलन से करीब 200 मीटर रास्ता मलबे में दब गया था, जिससे ग्रामीणों की आवाजाही बंद हो गई थी। ग्राम प्रधान राजपाल कुमार ने ब्लॉक से लेकर जिला प्रशासन से पैदल रास्ते के सुधारीकरण की मांग की, लेकिन कोई सहायता नहीं मिल पाई। इसे देखते हुए तातड़ा और सुगढ़ गांव की महिलाओं ने स्वयं ही रास्ते के सुधारीकरण की ठानी। महिलाओं ने स्वयं धनराशि एकत्रित कर कुदाल, फावड़े व अन्य संसाधन जुटाए और रास्ते से मलबा हटाने का काम शुरू कर दिया। दो दिन में ही 30 महिलाओं ने करीब एक किलोमीटर रास्ते से मलबा हटाकर और पुश्ते का निर्माण कर आवाजाही सुचारु कर दी। गांव की चंद्रा देवी, फागुणी देवी, रजनी, गुड्डी, विक्रम सिंह, बादर सिंह, धीरज सिंह, चंद्र सिंह ने बताया कि घाट-सुतोल सड़क से लेकर गांव के पैदल रास्ते बारिश से बदहाल पड़े हुए हैं। प्रशासन की ओर से सड़क व पैदल रास्ते के सुधारीकरण पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। ग्राम प्रधान राजपाल कुमार ने कहा कि महिलाओं की मेहनत और लगन से पैदल रास्ता चलने लायक हो गया है।