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बाजे-भंकारों की धुनों पर पांडवों ने किया नृत्य

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तोप गांव में आयोजित छह दिवसीय पांडव लीला को देखने के लिए सोमवार को सेम, भटोली, खाल, खगेली, उज्जवलपुर, धारकोट, आदिबदरी, चांदपुरगढ़ी गांवों से भारी संख्या में भक्तों की भीड़ उमड़ पड़ी। ढोल-दमाऊं की थाप और बाजे-भंकारों की मधुर ध्वनियों पर पांडव देवताओं ने पांडव चौक में परंपरागत नृत्य किया। इस दौरान पंडवाणी नृत्यगीत गाकर महाभारत की कथा सुनाई गई। भक्तों ने देवताओं पर पुष्पवर्षा और परिवार को राजी खुशी रखने व धनधान्य का वरदान मांगा।
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आयोजन के पहले दिन प्रात: जगदीश नौनी ने म्वर पूजा (द्वार पूजा) की। इसके बाद कालू लुहार को बाण प्रस्तुत करने के लिए आहूत किया। कुंती माता अवतरित हुईं और उसने सारे बाण कालू लुहार से ग्रहण कर धनुष सहित पांच भाई पांडवों को सौंपे। उसके बाद पांडवों की धनुष क्रीड़ा शुरू हुई। पांडवों ने ढोल दमाऊं के 36 तालों पर 16 कलाओं में आकर्षक नृत्य कर दर्शकों को भव विभोर कर दिया। बीच में पंडवांणी गायकों ने महाभारत के आख्यानों की प्रस्तुति दी। पंडित जगदीश नौनी ने बताया कि छह दिनों तक पांडव लीला जारी रहेगी।14 दिसंबर को गदा संधान के लिए पांडव जंगल प्रस्थान करेंगे, 15 को बाण क्रीड़ा, 16 को ग्राम भ्रमण, 17 को नदी स्नान और 18 को पांडव लीला का समापन होगा। ग्रामीण, महिला मंगल दल, युवक मंगल दल आयोजन को यादगार बनाने के लिए दिनरात सहयोग कर रहे हैं।
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