आदिबदरी मंदिर के कपाट बंद होने के अवसर पर मंदिर में उमड़ी भक्तों की भीड़।
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आदिबदरी मंदिर के कपाट बृहस्पतिवार को परंपरागत ढंग से देर शाम साढ़े सात बजे पौष माह के लिए बंद कर दिए गए। मंदिर के कपाट अब 14 जनवरी को मकर संक्रांति के पावन पर्व पर भक्तों के दर्शनों के लिए खुलेंगे। कपाट बंद होने के दौरान हुए समारोह में ममंद जुलगढ़ ने दैंणा ह्वय्यां खोली का गणेश..., प्रावि आदिबदरी के बच्चों ने नाथ शंभू भोले नाथ शंभू भोले... जागर व एसजीआरआर के बच्चों ने नौरातों की देवी दुर्गा... गीत की प्रस्तुति दी। इस दौरान सांसद अनिल बलूनी ने फोन से लोगों को संबोधित किया और आदिबदरी पर्यटन मेला समिति को दो लाख रुपये देने की घोषणा की।
बृहस्पतिवार को ब्रह्ममुहूर्त में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भगवान आदिबदरी के शृंगार दर्शन किए। सूर्योदय पर पुजारी चक्रधर थपलियाल ने अर्घ्य पूजा की। दोपहर में मंदिर प्रांगण में कपाट बंद समारोह का उद्घाटन राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय वैलनेस सेंटर के चिकित्साधिकारी डॉ. अंजू ने किया। उन्होंने कहा कि आदिबदरी का अपना विशेष महातम्य है। इस दौरान ढमकर, बेडी, सुगड़, नगली, स्यालकोट, मैतोली, थापली की महिलाओं ने धार्मिक गीतों और प्रावि ढमकर, नगली, भलसों, जीआईसी आदिबदरी के छात्र-छात्राओं ने लोकगीत व लोकनृत्य की प्रस्तुतियां दीं। समारोह में भाजपा के केंद्रीय मीडिया के सदस्य सतीश लखेड़ा का स्वागत किया गया। इस दौरान एनडीए की परीक्षा में पास हुए नगली गांव के अर्जुन कठैत, उनकी माता कुसुम कठैत व पिता प्रकाश कठैत को सम्मानित किया गया।
शाम को मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं ने कडाह भोग तैयार किया। रात्रि 7.30 बजे भगवान आदिबदरी नाथ की पंचज्वाला आरती उतारी गई और उन्हें भोग लगाने के बाद गर्भगृह में पुजारी चक्रधर थपलियाल ने भगवान आदिबदरीनाथ को निर्वाण स्वरूप देकर घृत कंबल लपेटा और फिर पौष माह के लिए कपाट बंद कर दिए। अध्यक्ष विजयेश नवानी ने कहा कि मकर संक्रांति को कपाट खुलने के दौरान मंदिर में सात दिवसीय महाभिषेक समारोह होगा। इस अवसर समिति के महासचिव गैंणा रावत, कोषाध्यक्ष नरेश बरमोला, बलवंत भंडारी, गंगा रावत, नरेंद्र चाकर, बृजेश कुंवर, यशवंत भंडारी, विजय चमोला, अरुण खंडूड़ी, नवीन बहुगुणा उपस्थित थे।