एक वर्ष तक सिद्धपीठ कुरुड़ में विराजमान होने के बाद मंगलवार को बधाण और दशोली मां नंदा की डोलियां कैलाश रवाना हुईं। दोनों डोलियों को महिलाओं और ध्याणियों (विवाहित बेटियां) ने मांगल गीत और जागर गाकर नम आंखों से कैलाश के लिए विदा किया। महिलाएं मां नंदा की डोलियों को विदा करने के लिए दूर गांवों तक गईं। विदाई के दौरान भक्त भावुक हो गए और संपूर्ण कुरुड़ क्षेत्र नंदामयी हो गया। इसी के साथ मां नंदा की लोकजात यात्रा शुरू हो गई है।
मंगलवार सुबह ब्रह्ममुहूर्त में महिलाओं ने मां नंदा का स्नान कराकर शृंगार किया। पूजा-अर्चना के बाद बधाण और दशोली की मां नदंा की दोनों डोलियों को दर्शनों के लिए मंदिर के मुख्य प्रांगण में रखा गया। यहां पर दूर दराज से आए भक्तों और ध्याणियों ने मां के दर्शन कर पूजा-अर्चना की। महिलाओं ने ऊंचा कैलाशों मां पैटण बैठिगे नंदा तेरा न्यौजा निशाण..., हेरि जाया, फेरी, नंदा मैता कु मुलुक..., बाडों की मुंगरी माता, झालों की काखड़ी, यख दाड़िम माता दांती अखरोट... जैसे जागर गाए। इस दौरान मां के पश्वाओं ने भक्तों को आशीर्वाद दिया और उसके बाद प्रसाद वितरण किया गया। भक्तों ने मां से सुख समृद्धि की कामना की। क्षेत्रीय विधायक मुन्नी देवी, कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष एवं पूर्व विधायक प्रो. जीतराम ने भी पूजा-अर्चना की। इसके बाद भक्तों ने मां नंदा की डोलियों को कैलाश विदा किया गया। भूमियाल के पश्वाओं ने डोलियों की अगुवाई की। देर शाम बधाण की डोली रात्रि विश्राम के लिए अपने प्रथम पड़ाव चरबंग, जबकि दशोली की डोली फरखेत गांव पहुंची। इस अवसर पर मंदिर समिति के दोनों अध्यक्ष मंसाराम गौड़ और भागवत सिंह बिष्ट, राजेश गौड़, सुरेंद्र बिष्ट, धनीराम, सुखबीर सिंह रौतेला, पूर्व प्रमुख करण सिंह, लक्ष्मण सिंह राणा, खिलाफ सिंह और सुरेंद्र सिंह सहित सैकड़ों लोग मौजूद रहे।
13 को होगा समापन
मंदिर समिति ने 25 पुजारियों की टीम बनाई है, यह पुजारी मां की डोलियों के साथ जाएंगे। 13 सितंबर को नंदा सप्तमी पर बेदनी कुंड और बालपाटा बुग्याल में डोलियों के पहुंचने के बाद लोकजात का समापन होगा।
विधायक के साथ मंदिर समिति के लोगों की बहस
मंदिर समिति के लोगों ने लोकजात को लेकर प्रशासन की ओर से बरती गई ढिलाई पर नाराजगी जताई। समिति के अध्यक्ष मंसाराम गौड़ ने कहा कि जिन रास्तों से मां की डोलियों को जाना है वह रास्ता खस्ताहाल है। जगह-जगह झाड़ियां उगी हैं, जिसके चलते डोलियों को ले जाने में काफी परेशानी उठानी पड़ेगी। इस बात को लेकर मंदिर समिति के लोगों की विधायक मुन्नी देवी से नोकझोंक भी हुई। उन्होंने विधायक से कहा कि उनका कार्यकाल समाप्त होने वाला है, लेकिन उनकी ओर से किए गए आश्वासनों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है, जिससे सभी भक्त मायूस हैं। इधर, विधायक ने यात्रा पड़ावों के रास्तों को ठीक करवाने और लोकजात यात्रा को पूरा सहयोग का भरोसा दिलाया।