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चमोली के ग्रामीणों की दरकार, बंदर, लंगूरों से मुक्ति दो सरकार

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चमोली जिले के ग्रामीण से लेकर शहरी क्षेत्रों तक बंदरों और लंगूरों का उत्पात मचा हुआ है। ग्रामीण क्षेत्रों में बंदरों और लंगूरों के डर से ग्रामीण आम रास्तों से गुजरने से भी डर रहे हैं। ग्रामीणों ने नई सरकार से इन जानवरों से छुटकारा दिलाने की मांग की।
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बंदरों के उत्पात से मंडल घाटी के कई ग्रामीणों ने अपने उपजाऊ खेतों को जोतना ही छोड़ दिया है। दशोली ब्लॉक के पूर्व ब्लॉक प्रमुख भगत सिंह बिष्ट का कहना है कि बंदर खेतों में फसलों को और घरों में खाद्य सामग्री को नुकसान पहुंचा रहे हैं। बंदरों से निजात दिलाने के लिए सरकार को कारगर योजना बनानी चाहिए। आदिबदरी क्षेत्र के कंड गांव निवासी चक्रधर प्रसाद का कहना है कि बंदर अब घरों के अंदर आने से भी नहीं डर रहे हैं और बच्चों के हाथों से रोटी भी छीनकर ले जा रहे हैं। फल-सब्जी के साथ ही पौधों को बंदर नुकसान पहुंचा रहे हैं। महिला मंगल दल अध्यक्ष माहेश्वरी देवी, कुसुम, शशिकला और सतेश्वरी देवी का कहना है कि धामी सरकार से एक ही गुहार है कि बंदरों के उत्पात से मुक्ति दिलाई जाए। बंदरों के कारण महिलाओं का खेतों में जाना भी मुश्किल हो गया है।
उनका कहना है कि बंदरों के साथ ही अब लंगूर भी गांवों में पहुंच गए हैं। कई बार वन विभाग से इन्हें पिंजरे में कैद करने की मांग की गई, लेकिन इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। श्रीनंदा देवी महिला लोक विकास समिति की सचिव डा. किरन पुरोहित का कहना है कि सरकार की कृषि से संबंधित कई लाभकारी योजनाएं संचालित हो रही हैं, लेकिन बंदर और लंगूर काश्तकारों के लिए मुसीबत बने हुए हैं। ऐसे में कैसे उनकी आय दोगुनी हो पाएगी।
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जंगली सूअर बर्बाद कर रहे आलू की फसल
सोल घाटी आलू उत्पादन के लिए प्रसिद्ध है। यहां का स्वादिष्ट आलू देश की कई मंडियों में जाता है। अपने विशेष स्वाद के लिए इसकी मांग अधिक है व मंडियों में इसका अच्छा रेट भी मिलता है लेकिन घाटी के कई गांवों में जंगली सूअर आलू की फसल को नुकसान पहुंचा रहे हैं।
डुंग्री, रूईसाण, रतगांव, गेरूड़, लेटाल, गुमड़, बूंगा, बुरसोल गांवों में लोगों के रोजगार का जरिया यही आलू है, लेकिन पिछले कुछ वर्षों से जंगली सूअर आलू की फसल को चौपट कर रहे हैं। जंगली जानवर खेतों में आलू बोने के तुरंत बाद ही खेत खोदकर बीज खा जाते हैं जिससे खेतों में आलू के पौधे ही नहीं उग पा रहे। इससे काश्तकारों में निराशा है। सोल विकास समिति के अध्यक्ष चरण सिंह, रणजीत सिंह, मोहन सिंह, प्रेम सिंह, नवीन मिश्रा ने सरकार और वन विभाग से फसलों को जानवरों से बचाने की मांग की।
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