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नहीं खुल पाया मलारी हाईवे

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मलारी हाईवे अवरूद्घ होने से ग्रामीणों की पैदल आवाजाही करवाते एनडीआरएफ व एसडीआरएफ के जवान। - फोटो : GOPESHWAR
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भारत-चीन सीमा को जोड़ने वाला मलारी हाईवे मंगलवार को 11वें दिन भी सुचारु नहीं हो पाया। अधिकारियों का कहना है कि हाईवे पर टनों मलबा और बोल्डर जमा है। इसे हटाने में अभी दो दिन और लग सकते हैं। वहीं, मौसम खराब होने के कारण नीती घाटी में हेलीकॉप्टर उड़ान नहीं भर पाया। स्थानीय लोगों के साथ ही सेना के जवान पैदल रास्ते पर जान जोखिम में डालकर आवाजाही कर रहे हैं।
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मलारी हाईवे पर सुराईंथोटा और तमक गांव के बीच भूस्खलन के कारण 14 अगस्त से अवरुद्ध है। जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी नंद किशोर जोशी ने बताया कि नीती घाटी में सबकुछ सामान्य है। घाटी में राशन डीलरों के पास पर्याप्त राशन है। साथ ही सरकारी अस्पताल में दवाएं भी उपलब्ध हैं। बुधवार को मौसम सामान्य होने पर हेलीकॉप्टर सेवा दोबारा शुरू हो जाएगी। जोशीमठ की उपजिलाधिकारी कुमकुम जोशी ने बताया कि बीआरओ की ओर से हाईवे को खोलने का काम जारी है। सीमांत क्षेत्र में मेडिकल टीम व खाद्यान्न की सप्लाई कर दी गई है। पैदल मार्ग पर एनडीआरएफ ओर एसडीआरएफ की टीम ग्रामीणों की आवाजाही करवा रही है।
आमरण अनशन दूसरे दिन भी जारी
सीमांत क्षेत्र की विभिन्न समस्याओं को लेकर ठाकुर सिंह राणा का आमरण अनशन मंगलवार को दूसरे दिन भी जारी रहा। उनका कहना है कि मलारी हाईवे के बाधित होने से ग्रामीण त्रस्त हैं। घाटी में बिजली आपूर्ति ठप है। प्रशासन की ओर से घाटी की सुध नहीं ली जा रही है। इस मौके पर ग्राम प्रधान लक्ष्मण सिंह बुटोला, प्रेम सिंह बुटोला, ब्लॉक अध्यक्ष हरीश भंडारी, क्षेत्र पंचायत सदस्य सतेंद्र सिंह राणा, पूर्व प्रधान नरेंद्र रावत, द्रोणागिरी के प्रधान रुद्र सिंह रावत आदि मौजूद थे।
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