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लार्ड कर्जन ट्रेक : अंग्रेजों ने बनाया, अपनों ने भुलाया

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चमोली में लार्ड कर्जन रोड के क्षतिग्रस्त पुल से गुजरते पर्यटक। - फोटो : GOPESHWAR
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कभी देश-विदेश के पर्यटकों की पहली पसंद रहा लार्ड कर्जन ट्रेक (अल्मोड़ा-ग्वालदम-तपोवन ट्रेक) को सरकारों ने भुला दिया है। सुरम्य बुग्यालों, घने जंगलों और गांवों के बीच से गुजरने वाले इस ट्रेक को टूरिस्ट डेस्टिनेशन के रुप में विकसित किया जा सकता था, लेकिन देखरेख के अभाव में यह ट्रेक बदहाल पड़ा है।
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ब्रिटिश हुकूमत के दौरान वर्ष 1902 में वायसराय लार्ड कर्जन उत्तराखंड भ्रमण पर आए थे। तब वे यहां की प्राकृतिक सुंदरता के इतने मुरीद हुए कि उन्होंने अल्मोड़ा से ग्वालदम, वाण, सुतोल, कनोल, रामणी, झींझी, पाणा, क्वांरीपास, करछों और तपोवन तक करीब 200 किलोमीटर का पैदल ट्रैक का निर्माण करवा दिया। देश की आजादी के बाद इस ट्रेक को भुला दिया गया। उत्तराखंड राज्य गठन के बाद उम्मीद जगी थी कि इस एतिहासिक ट्रेक का संरक्षण होगा और यहां सुविधाएं बढे़ंगी, लेकिन यहां सत्ता में आई सरकारों ने भी इस ट्रेक को भुला दिया है।
यह ट्रेक चमोली जिला पंचायत के अधीन है। जिला पंचायत की ओर से वर्ष 2005 में राष्ट्रीय सम विकास योजना के तहत 49 लाख रुपये खर्च कर ट्रेक का सुधारीकरण कार्य किया गया था, लेकिन इसके बाद से इस ट्रेक की सुध नहीं ली गई। आज यह ट्रेक जगह-जगह ध्वस्त पड़ा हुआ है। पैदल पुलिया भी टूट चुकी हैं। देश-विदेश के पर्यटक जान जोखिम में डालकर इस ट्रेकसे आवाजाही कर रहे हैं।
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हिमालयी क्षेत्र की पैदल यात्रा करना चाहते थे लार्ड कर्जन
लार्ड कर्जन वर्ष 1899 से 1905 तक ब्रिटिश भारत के वायसराय रहे। अपने कार्यकाल में उन्होंने संपूर्ण भारत का भ्रमण किया। वे उत्तराखंड के हिमालयी क्षेत्र की पैदल यात्रा करना चाहते थे। उनके प्रस्तावित दौरे को देखते हुए अल्मोड़ा से तपोवन तक (200 किलोमीटर लंबा) पैदल ट्रेक का निर्माण किया गया। यह ट्रेक कई जगहों पर दस हजार फीट की ऊंचाई से होकर गुजरता है। हालांकि ब्रिटिश सरकार ने किन्हीं कारणों से लार्ड कर्जन को वापस बुला लिया था, जिस कारण वे इस रूट पर नहीं आ पाए थे। साहसिक पर्यटन की दृष्टि से इस ट्रेक को आज भी लार्ड कर्जन ट्रेक के रुप में जाना जाता है।
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लार्ड कर्जन रोड पर कभी वर्षभर पर्यटकों की आवाजाही बनी रहती थी, लेकिन आज संरक्षण के अभाव में यह ट्रेक बदहाल पड़ा हुआ है। झींझी गांव के समीप ट्रेक पर पुलिया क्षतिग्रस्त पड़ी हुई है। रामणी से झींझी तक ट्रेक कई जगहों पर क्षतिग्रस्त पड़ा है।
-ओमप्रकाश भट्ट, सचिव, सीपीबी पर्यावरण संरक्षण समिति

चमोली के सुदूर सुरम्य बुग्यालों के बीच से स्थित लार्ड कर्जन रोड से गुजरते पर्यटक।- फोटो : GOPESHWAR

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