बदरीनाथ हाईवे पर डंपिंग जोन के लिए डेंकण के बीज एकत्रित करने में जुटे धन सिंह घरिया।
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बदरीनाथ हाईवे पर ऋषिकेश से देश के अंतिम गांव माणा तक करीब 250 किलोमीटर हाईवे पर बने ऑलवेदर रोड के डंपिंग जोन अब हरित पट्टी में तब्दील होंगे। चमोली पर्यावरण युवा समिति ने इसकी योजना तैयार की है। इसके लिए इन दिनों बीजों का भंडारण किया जा रहा है।
वर्ष 2019 से बदरीनाथ हाईवे पर ऑलवेदर रोड परियोजना कार्य शुरू हुआ था। चट्टान और पहाड़ियों को काटकर सड़क का चौड़ीकरण किया गया है। चट्टान से निकले पत्थरों से सड़क के दोनों ओर दीवार का निर्माण कार्य किया गया, जबकि मलबे को अलकनंदा के किनारे डंप किया गया। अब ऑलवेदर रोड परियोजना कार्य अंतिम चरण में है। गौचर से हेलंग तक अब मात्र 10 किलोमीटर की हिल कटिंग बाकी है।
चमोली पर्यावरण युवा समिति ने डंपिंग जोन को हरित पट्टी के रूप में विकसित करने की योजना बनाई है। इसके तहत डेंकण, खड़ीक, अंगू, पदम, तुन के पौधे रोपित किए जाएंगे। समिति के अध्यक्ष पर्यावरण प्रेमी शिक्षक धन सिंह घरिया ने बताया कि चमोली पर्यावरण युवा समिति से जुड़े 15 युवा पौधे लगाने का काम करेंगे।
उन्होंने कहा कि ऑलवेदर रोड परियोजना कार्य से सुगम और सुरक्षित सड़क तो मिल गई है, लेकिन सड़क किनारे के छोटे पौधे व बड़े पेड़ नष्ट हो गए हैं। चारों ओर मिट्टी के ढेर नजर आ रहे हैं। डंपिंग जोन की मिट्टी बरसात में खिसक कर नदी में जा रही है। हाईवे किनारे कंचन गंगा से लेकर ऋषिकेश तक जगह-जगह डंपिंग जोन में पौधे लगाए जाएंगे। संवाद
वन विभाग भी करेगा पौधरोपण
ऑलवेदर रोड परियोजना कार्य शुरू होने के दौरान ही एनएचआईडीसीएल (राष्ट्रीय राजमार्ग एवं ढांचागत विकास) और वन विभाग के बीच डंपिंग जोन में पौधरोपण के लिए करार हुआ था। एनएचआईडीसीएल के महाप्रबंधक संदीप कार्की ने बताया कि वन विभाग की ओर से भी डंपिंग जोन में पौधरोपण किया जाएगा। उन्होंने कहा कि चमोली पर्यावरण युवा समिति की पहल सराहनीय है।