माणा में सांस्कृतिक कार्यक्रम में प्रतिभाग करने वाले छात्र-छात्राओं को पुरस्कृत करते न्यायमूर?
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सर्वोच्च न्यायालय (सुप्रीम कोर्ट) के वरिष्ठ न्यायमूर्ति एवं राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष उदय उमेश ललित बुधवार को देश के अंतिम गांव माणा में आयोजित बहुउद्देशीय शिविर में शामिल हुए। उन्होंने कहा कि विधिक सेवा प्राधिकरण का उद्देश्य हर जरूरतमंद लोगों तक सुगमता से न्याय पहुंचाना है। सभी नागरिकों को संवैधानिक अधिकार और न्याय मिलना चाहिए। सीमांत क्षेत्रों में विधिक साक्षरता शिविर के माध्यम से जरूरतमंद लोगों तक न्याय पहुंचाना उनकी प्राथमिकता है। इससे पूर्व उन्होंने बदरीनाथ में पूजा कर देश की खुशहाली की कामना की। बीकेटीसी ने उन्हें तुलसी की माला भेंट की।
राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण और उत्तराखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से बहुउद्देशीय शिविर आयोजित किया गया। शिविर में पहुंचे न्यायमूर्ति उदय उमेश ललित ने शिविर में लगाए गए सरकारी विभागों के स्टालों का निरीक्षण करते हुए दिव्यांगजनों में बैसाखी, व्हील चेयर और कंबल भी वितरित किए। ग्रामीणों ने उनका भव्य स्वागत किया। इस दौरान छात्र-छात्राओं ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं और शानदार प्रस्तुति पर वरिष्ठ न्यायमूर्ति ने उन्हें सम्मानित भी किया। विभिन्न विभागों की ओर से स्टॉल लगाकर लोगों की समस्याओं का मौके पर ही समाधान किया गया। उच्च न्यायालय नैनीताल के कार्यवाहक मुख्य न्यायमूर्ति व उत्तराखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के कार्यकारी अध्यक्ष एसके मिश्रा ने न्यायमूर्ति को रुद्राक्ष का पौधा, स्मृति चिह्न और शॉल भेंटकर उनका स्वागत किया। जिला न्यायाधीश नरेंद्र दत्त ने विधिक सेवाओं की जानकारी दी। संचालन जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सिविल जज (सीनियर डिविजन) सिमरनजीत कौर ने किया।