चमोली से लगे तिब्बत सीमा पर देवताल में पूजा-अर्चना करते माणा गांव के ग्रामीण।
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भारत-चीन युद्ध के बाद से बंद पड़े धार्मिक स्थल देवताल में 59 साल बाद देश के अंतिम गांव माणा के ग्रामीण पूजा-अर्चना करने पहुंचे। इस दौरान आईटीबीपी की टीम भी उनके साथ मौजूद रही।
18 हजार फीट की ऊंचाई में स्थित देवताल माणा गांव से लगभग 52 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। भारत-तिब्बत सीमा पर स्थित होने के कारण यहां आने के लिए प्रशासन की अनुमति जरूरी है। माणा गांव के ग्रामीणों ने कोरोना संक्रमण से मुक्ति, समाज की कुशलता और चारधाम यात्रा के आयोजन के लिए देवताल में पूजा अर्चना करने का निर्णय लिया था। प्रशासन की अनुमति मिलने के बाद ग्रामीण शनिवार को देवताल के लिए रवाना हुए और मंगलवार को माणा गांव पहुंचे। बदरीनाथ धाम के धर्माधिकारी भुवन चंद्र उनियाल का कहना है कि देवताल का आध्यात्मिक महत्व है। मान्यता है कि द्वापर युग में भगवान श्रीकृष्ण देवताल से होते हुए कैलाश मानसरोवर पहुंचे थे। भारत-तिब्बत व्यापार के दौरान स्थानीय लोग प्रतिवर्ष देवताल में पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते थे। माणा गांव के ग्राम प्रधान पीतांबर मोल्फा ने बताया कि वर्ष 1962 में भारत-चीन युद्ध के बाद से ग्रामीण देवताल नहीं गए थे। इस बार ग्रामीणों ने देवताल पहुंचकर पितरों की शांति के लिए पूजा-अर्चना की। यात्रा में मोहन सिंह, राजेंद्र सिंह, लक्ष्मण सिंह, गायत्री देवी, बसंती देवी, रामेश्वरी आदि मौजूद थे।