बागेश्वर। नामिक और हीरामणि ग्लेशियर की तलहटी में बसे नामिक लोगों की दिक्कतें भी हिमालय की तरह जटिल हैं। आजादी के 74 वर्ष बीतने के बाद भी सुंदर गांव नामिक के लोगों को यातायात की सुविधा नहीं मिली है। सड़क न होने से नामिक के लोगों को बीमार और असहाय लोगों को डोली से ढोना पड़ता है।
विगत दिवस नामिक निवासी दिव्यांग खीम राम पुत्र कुंवर राम की तबियत खराब हो गई। नामिक में स्वास्थ्य सुविधा न होने से गांव के लोग उन्हें डोली से सात किमी दूर गोगिना तक लाए। वहां से वाहन से कपकोट के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लाया गया। जहां उनकी तबियत में सुधार है। पिथौरागढ़ जिले के सीमांत के गांव नामिक जाने के लिए पिथौरागढ़ जिले के बिर्थी से 27 किमी की पैदल दूरी तय करनी पड़ती है। बागेश्वर जिले की सीमा से सटा नामिक गांव बागेश्वर के गोगिना से सात किमी दूर है। नामिक के लोग स्वास्थ्य, बैकिंग, पोस्टल सेवा के लिए बागेश्वर पर निर्भर हैं। सड़क सुविधा न होने से अक्सर इस तरह की दिक्कत सामने आती है।
दो-दो सड़कें मंजूर, एक में धीमा काम, एक में काम ही शुरू नहीं
बागेश्वर। तमाम अभावों के बाद भी जैविक गांव नामिक के लोगों ने अपनी माटी नहीं छोड़ी है। नामिक में 125 परिवार निवास करते हैं। सुंदर नामिक की समस्याओं को दूर कराने के लिए अमर उजाला ने लंबा अभियान चलाया। वर्ष 2015 में पिथौरागढ़ के होकरा से नामिक के लिए 17 किमी लंबी सड़क मंजूर की गई। इस सड़क का काम बेहद धीमी गति से चल रहा है। वर्ष 2015 में ही बागेश्वर के गोगिना से भी नामिक के
लिए 8 किमी लंबी सड़क स्वीकृत की गई। इस सड़क के निर्माण का रास्ता अब भी प्रशस्त नहीं हुआ है। संवाद
कोट
नामिक के स्वीकृत सड़क के लिए पूर्व में सर्वे की गई थी। पवन भूमि के निस्तारण के लिए प्रस्ताव वन एवं पर्यावरण मंत्रालय को भेजा गया था। जमीन किसी अन्य प्रयोजन में काम आ गई थी। दूसरी बार वन पंचायत की भूमि से सर्वे की गई है। वन पंचायत की एनओसी मिल गई है। उपजिलाधिकारी के माध्यम से वन भूमि निस्तारण के लिए प्रस्ताव डीएफओ को भेजा गया है।
एसएन पांडेय ईई लोनिवि कपकोट