जलवायु परिवर्तन का असर ग्लेशियरों पर पड़ने लगा है। कभी सालभर बर्फ से लकदक रहने वाले इन ग्लेशियरों का सौंदर्य इस बार फीका पड़ गया है। यहां अब पहले जैसी बर्फ नहीं दिखती है। दस साल पहले ग्लेशियरों की तलहटी में बसे जो गांव नवंबर से मार्च तक बर्फ से लकदक रहते थे, आज वहां जनवरी में भी बर्फ नहीं है। इस बार सर्दियों में बारिश और बर्फबारी नहीं होने का असर क्षेत्र के जनजीवन पर भी पड़ा है।
हमारे गांवों की पहचान ही बर्फ से थी। 20-30 साल पहले जैसी बर्फ गिरती थी, अब वैसी देखना दुर्लभ हो गया है। अब बर्फबारी जनवरी के बाद हो रही है। तापमान में भी अंतर आ रहा है। ग्लेशियर काले पड़ रहे हैं। - पान सिंह,(83), निवासी गोगिना जिन पहाड़ों को हमने सालभर बर्फ से लकदक देखा था, उनमें से कई में अब हिमपात होने पर ही बर्फ दिखती है। हीरामणि और नामिक ग्लेशियर भी ज्यादातर काले दिखते हैं।
- गोविंद सिंह रौतेला (79), निवासी गोगिना
20-25 साल से हिमालय पर जलवायु परिवर्तन का प्रभाव पड़ रहा है। अब अक्तूबर के बजाय फरवरी-मार्च में बर्फ गिर रही है। जिस तापमान में बर्फ गिर रही है, उसमें बर्फ को जमने का मौका नहीं मिल रहा है। - डॉ. डीपी डोभाल, सेवानिवृत सीनियर हिम वैज्ञानिक, वाडिया इंस्टीट्यूट ऑफ हिमालयन जियोलॉजी, देहरादून