बागेश्वर। पथरी के मरीज लगातार बढ़ रहे हैं। हर आयु वर्ग के लोग इससे परेशान हैं। बावजूद इसके लोगों को पथरी के इलाज या ऑपरेशन के लिए मीलों की दौड़ लगानी पड़ती है। इसके चलते कई लोग समय पर पथरी का ऑपरेशन नहीं करा पाते हैं। मात्र 10 फीसदी लोगों के ही ऑपरेशन जिला अस्पताल में होते हैं, शेष मरीज दूसरे जिलों और महानगरों में इलाज कराने के लिए मजबूर हैं।
जिला अस्पताल बागेश्वर में पथरी का ऑपरेशन आज भी पुरानी विधि से किया जाता है। लेप्रोस्कोपी मशीन के अभाव में चीर-फाड़ करके ही मरीजों के ऑपरेशन किए जाते हैं। लगातार पथरी के मरीजों की संख्या बढ़ने के बावजूद अस्पताल में यह मशीन नहीं लग सकी है। जिले की ढाई लाख से अधिक की आबादी इलाज के लिए जिला अस्पताल पर निर्भर हैं, लेकिन पिछले कई वर्षों से अस्पताल की स्वास्थ्य सुविधाओं में ज्यादा सुधार नहीं आया है। बागेश्वर के अधिकतर लोगों को पथरी के उपचार के लिए जिले से बाहर अल्मोड़ा, हल्द्वानी, बरेली, दिल्ली आदि शहरों में जाना पड़ता है।
जिला अस्पताल के सर्जन डॉ. राजीव उपाध्याय ने बताया कि जिला अस्पताल में हर माह करीब 80-90 मामले पथरी के आते हैं। इसमें ज्यादातर लोग दूरबीन विधि से ऑपरेशन कराने के लिए सहमत होते हैं, लेकिन जिला अस्पताल में फिलहाल ऐसी कोई व्यवस्था नहीं है। इस कारण अधिकतर मरीज अन्य जगहों से ऑपरेशन कराते हैं। यहां हर महीने लगभग आठ से 10 लोगों का ऑपरेशन किया जाता है।
जिला अस्पताल में लेप्रोस्कोपी मशीन लगाने के प्रयास किए जा रहे हैं। जल्द ही इस मामले में डिजी कार्यालय को अवगत कराया जाएगा। - डॉ. वीके सक्सेना, उप मुख्य चिकित्साधिकारी।