अल्मोड़ा। पेयजल निगम के राजकीयकरण की मांग को लेकर उत्तराखंड पेयजल निगम के अधिकारियों और कर्मचारियों ने मंगलवार को लोअर मालरोड स्थित अधीक्षण अभियंता निर्माण मंडल कार्यालय प्रांगण में धरना दिया। कार्मिकों ने सरकार के खिलाफ आक्रोश जताया और एक सूत्रीय मांग को पूरा करने की मांग की।
अधिकारी कर्मचारी संयुक्त समन्वय समिति के बैनर तले निगम के नगर क्षेत्र के अधिकारी और कर्मचारी सोमवार को लोअर मालरोड स्थित अधीक्षण अभियंता कार्यालय पहुंचे और धरना दिया। उन्होंने कहा कि कोविड-19 वैश्विक महामारी में निगम के कार्मिक जान जोखिम में डालकर कार्यों का निष्ठापूर्वक वहन कर रहे हैं, पर शासन उन्हें समय पर वेतन और पेंशन तक नहीं दे पा रहा है। उत्तराखंड पेयजल निगम एक राजकीय निगम है। राजकीय निगम होने के नाते सरकार का दायित्व है कि वह कार्मिकों को वेतन, पेंशन समेत लंबित देयकों का भुगतान करे।
उन्होंने कहा कि यदि सरकार जल्द मांग पूरी नहीं करती है तो 28 अक्तूबर से पेयजल निगम के अधिकारी कर्मचारी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले जाएंगे। धरने की अध्यक्षता एई गणेश दत्त तिवारी ने की। सभा में नरेंद्र सिंह बिष्ट, राहुल बिष्ट, दिनेश भट्ट, दीपक तिवारी, कुंदन अधिकारी, पंकज कुमार आर्या, सुनील दत्त, पान सिंह नेगी, दीपा जोशी, निर्मला रावत, संगीता आर्या, गोवर्धन कांडपाल आदि ने विचार रखे।
पेयजल निगम कर्मियों ने दिया धरना
बागेश्वर। पेयजल निगम कर्मचारियों ने निगम का राजकीयकरण और तीन महीने का रुका वेतन देेने की मांग के लिए कार्यालय परिसर में धरना दिया। कर्मचारियों ने 28 से बेमियादी हड़ताल की चेतावनी दी है।
मंगलवार को धरने पर बैठे कर्मचारियों ने मई, जून और जुलाई का वेतन नहीं मिलने पर नाराजगी जताते हुए जल्द वेतन का भुगतान करने की मांग की। कर्मचारियों ने कहा कि उत्तराखंड पेयजल निगम और जल संस्थान का एकीकरण होने से सबसे अधिक लाभ राज्य के लोगों को मिलेगा। वहां पर लीलाधर अंडोला, कमला देवी, चंद्रा देवी, भास्करानंद उपाध्याय, चंदन सिंह, जयशंकर सिंह राणा, कैलाश सिंह राणा, भुवन लोहनी आदि थे।
बागेश्वर में धरना देते पेयजल निगम कर्मी। विज्ञप्ति- फोटो : BAGESHWAR