फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

सुंदरढूंगा ट्रैकिंग रूट के एक्सपर्ट गाइड थे खिलाफ सिंह दानू

विज्ञापन
लापता गाइड खिलाफ सिंह दानू। (फाइल फोटो) - फोटो : BAGESHWAR
विज्ञापन
बागेश्वर। सुंदरढूंगा ग्लेशियर ट्रैकिंग रूट में लापता गाइड खिलाफ सिंह दानू रूट के एक्सपर्ट टूरिस्ट गाइड थे। वह कई वर्षों से इस रूट पर साहसिक पर्यटन से जुड़े हुए थे। अब तक वह सैकड़ों देशी, विदेशी दलों को सुंदरढूंगा ग्लेशियर के दीदार करा चुके थे। इस बार वह चार स्थानीय पोर्टरों के साथ पश्चिम बंगाल के पांच ट्रैकरों को सुंदरढूंगा ग्लेशियर ले गए थे। 17 अक्तूबर को बर्फीला तूफान आने पर खिलाफ सिंह दानू ने चारों पोर्टरों को वापस भेजा और पीछे से पांचों बंगाली ट्रैकरों को लेकर आने लगे। पोर्टर तो सकुशल लौट आए, लेकिन खिलाफ और पांचों बंगाली ट्रैकर वापस नहीं लौट सके। खिलाफ सिंह के परिवारजनों ने खिलाफ सिंह दानू के जीवित होने की आस छोड़ दी है।
विज्ञापन

बीते 12 अक्तूबर को पश्चिम बंगाल से आए पांच ट्रैकरों को लेकर वाछम से गाइड खिलाफ सिंह दानू (35) और चार पोर्टर सुरेश सिंह दानू, तारा सिंह दानू, विनोद सिंह दानू और कैलाश सिंह दानू सुंदरढूंगा रवाना हुए थे। पोर्टर सुरेश सिंह दानू के अनुसार 17 अक्तूबर को दल जातोली, कठलिया, मैकतोली, बैलूनी टॉप होते हुए भनार पहुंचा। उस दिन मौसम काफी खराब हो गया था। शाम को करीब साढ़े चार बजे से बर्फबारी शुरू हो गई। 18 अक्तूबर को दल ने कनकटा पास की ओर कदम बढ़ाए। तभी भारी बर्फबारी होने लगी। बर्फीला तूफान आने लगा। वे वापस कठलिया लौटने लगे। टैंट लगाने की व्यवस्था नहीं हो सकी। ठंड बढ़ने से भनार के पास एक बंगाली पर्यटक की हालत बिगड़ने लगी। उसके हाथ पांव सुन्न पड़ गए। पोर्टरों ने उसे पानी पिलाया और पीठ में उठाकर नीचे की ओर लाने लगे। कुछ देर बाद पोर्टर भी थक गए। बर्फीला तूफान तेज होता रहा और सभी लोग जान बचाने की कोशिश करने लगे। गाइड खिलाफ सिंह दानू ने चारों पोर्टरों से आगे चलने के लिए कहा और खुद ट्रैकरों को लेकर पीछे से आने लगे। चारों पोर्टर तो लौट आए, लेकिन खिलाफ और पांचों बंगाली ट्रैकर वापस नहीं आ सके।
सुंदरढूंगा ट्रैकिंग रूट के चप्पे-चप्पे वाकिफ थे खिलाफ
बागेश्वर। गाइड खिलाफ सिंह दानू सुंदरढूंगा ट्रैकिंग रूट के चप्पे-चप्पे से वाकिफ थे। वापस आए पोर्टर बताते हैं कि खिलाफ को ट्रैकिंग रूट के कदम-कदम की जानकारी थी। वह ट्रैकरों को ट्रैकिंग रूट में पड़ने वाले नदी, नाले, गाड़-गधेरे, गुफाओं, दर्रों, चट्टानों की जानकारी देते थे। उनके बारे में प्रचलित किंवदंतियां सुनाते थे। ट्रैकरों के साथ हंसी मजाक करते हुए 42 किमी के ट्रैकिंग रूट में ट्रैकरों की हर जरूरत का ख्याल रखते थे।
विज्ञापन

सात साल पहले हो गया था, खिलाफ की पत्नी का निधन
बागेश्वर। खिलाफ सिंह दानू की पत्नी मोहनी देवी का लंबी बीमारी के बाद वर्ष 2014 में निधन हो गया था। खिलाफ के तीन बच्चे हैं। सबसे बड़ी बेटी खष्टी कक्षा नौ में पढ़ती है। लड़का गोलू दिव्यांग है और कक्षा छह में पढ़ता है। गोलू से छोटी लड़की कक्षा चार में पढ़ती है। पत्नी की मौत के बाद खिलाफ ने बच्चों को मां की कमी का एहसास नहीं होने दिया। खिलाफ बच्चों की हर जरूरत पूरी करते थे। गांव के लोग बताते हैं कि कोरोना लॉक डाउन में खिलाफ ने तीनों बच्चों को पिंडारी, कफ़नी और सुंदरढूंगा ग्लेशियर का भ्रमण कराया था। वह अपने बच्चों को भी हिमालय की कठिनाइयों से रूबरू कराकर मजबूत बनाना चाहते थे।
फोटो 24 बीजीएस 11 पी
सात सदस्यीय दल खोजबीन के लिए रविवार को हुआ सुंदरढूंगा रवाना
कपकोट। सुंदरढूंगा ग्लेशियर से लापता ट्रैकरों और स्थानीय गाइड की खोजबीन का कार्य चौथे दिन भी जारी रहा। रविवार को हेलीकॉप्टरों ने छह बार घटनास्थल के लिए उड़ान भरी लेकिन खराब मौसम के कारण रेस्क्यू अभियान नहीं चलाया जा सका।
कपकोट के एसडीएम पारितोष वर्मा ने बताया कि उच्च हिमालयी क्षेत्र में वर्षा होने के कारण सेना के दो हेलीकॉप्टरों के माध्यम से रेस्क्यू के लिए गए 7 सदस्यीय दल को कठलिया में उतारना पड़ा। एसडीएम ने बताया कि एसडीआएफ के जवानों सहित छह सदस्यों के दल को शनिवार को जातोली से पैदल रवाना किया गया था। दोनों दलों में एसडीआरएफ के आठ जवान, दो पोर्टर, एक गाइड और दो स्थानीय लोग शामिल हैं। दोनों दल रविवार को कठलिया से देवीकुंड (घटनास्थल) के लिए रवाना हुए हैं। मौसम ठीक रहा तो रविवार शाम तक रेस्क्यू दल के घटनास्थल पर पहुंचने की संभावना है।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें