फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

पहाड़ों की होली का बदल रहा स्वरूप, संस्कृति संरक्षण में यवाओं को लेनी होगी जिम्मेदारी

विज्ञापन
बाला दत्त तिवारी - फोटो : BAGESHWAR
विज्ञापन
बागेश्वर। पहाड़ों में इन दिनों खड़ी होली गायन का जोर है। ग्रामीण अंचलों में होल्यार घर-घर जाकर खड़ी होली गायन में मस्त हैं। हालांकि होली में अब पहले जैसा रस नहीं दिख रहा है, इस पर जिले के वरिष्ठ जनों में चिंता का भाव है। वरिष्ठ नागरिकों का मानना है कि खड़ी होली गायन की समृद्ध विरासत अब कहीं पीछे छूटती जा रही है। युवा पीढ़ी खड़ी होली को गंभीरता से नहीं ले रही है।
विज्ञापन

प्रबुद्धजनों का कहना है कि किसी जमाने में बुजुर्ग होल्यार खड़ी होली गीतों को संकलित करते थे और युवा पीढ़ी को होली गायन का अभ्यास कराया जाता था। कुछ गांवों में अब भी यह चलन है लेकिन अधिकांश स्थानों में लोग खड़ी होली के गायन में सिमटते जा रहे हैं। तीज-त्योहारों पर नशे का हावी होना भी होली के लिए नुकसानदायक साबित हो रहा है। होली में शराब का चलन बढ़ता जा रहा है। जिसका प्रभाव होली के सौहार्द और समरसता वाली सोच पर भारी पड़ रहा है। खड़ी होली गायन की समृद्ध परंपरा अब हुड़दंग में बदलती जा रही है। वर्ष 2023 से बागेश्वर नगर में भी वरिष्ठ नागरिक कल्याण न्यास के माध्यम से खड़ी होली की परंपरा शुरू करने की बात चल रही है।
बागेश्वर नगर में खड़ी होली गायन की परंपरा कभी साकार नहीं हो सकी। हालांकि ग्रामीण क्षेत्रों में खड़ी होली गायन का लंबा इतिहास रहा है। आज भी जिले के अधिकांश गांवों में खड़ी होली गायन होता है, लेकिन उसका स्वरूप अब बिगड़ने लगा है। होली की समृद्ध विरासत को बचाने के लिए युवाओं को खड़ी होली गायन से जोड़ना होगा। होली पर नशीले पदार्थों को पूरी तरह से प्रतिबंधित करने की जरूरत है।
विज्ञापन
विज्ञापन

दलीप सिंह खेतवाल, वरिष्ठ नागरिक

दलीप सिंह खेतवाल- फोटो : BAGESHWAR

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें