बागेश्वर। महाराष्ट्र के राज्यपाल और प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री भगत सिंह कोश्यारी पांच नवंबर को दीपावली मनाने अपने पैतृक गांव किसमिला, नामतीचेटाबगड़ आ रहे हैं। राज्यपाल बनने के बाद वह पहली बार गांव आएंगे। गांव में उनके स्वागत की जोरदार तैयारियां हो रही हैं। विधायक बलवंत सिंह भौर्याल ने स्वयं गांव जाकर तैयारियों का जायजा लिया है। हालांकि त्योहार के दौरान कोश्यारी के जिला भ्रमण का कार्यक्रम निजी बताया जा रहा है, लेकिन उनके आगमन से राजनीतिक गलियारों में हलचल बढ़ गई हैं। उनके दौरे को लेकर आगामी विधानसभा चुनाव में होने वाली उम्मीदवारी तय होने के कयास भी लगाए जा रहे हैं।
पूर्व सीएम कोश्यारी का प्रदेश की राजनीति में बड़ा प्रभाव है। महाराष्ट्र का राज्यपाल होने के बावजूद वह प्रदेश की राजनीति में पूरा दखल रखते हैं। अगले वर्ष प्रदेश में विधानसभा चुनाव होने हैं, ऐसे में उनका दीपावली पर अपने गांव आना भी चर्चा का विषय बन गया है। विधायक भौर्याल ने कोश्यारी के आगमन की सूचना मिलते ही उनके गांव जाकर इंतजामों की समीक्षा भी कर ली है। इससे पूर्व विधायक ने कपकोट में भी ब्लॉक प्रमुख, एसडीएम के साथ बैठक कर कोश्यारी के आगमन और कार्यक्रमों को लेकर चर्चा की थी।
भाजपा के विधानसभा चुनाव को लेकर कपकोट से विधायक भौर्याल के साथ-साथ पूर्व विधायक शेर सिंह गढ़िया और राज्यपाल कोश्यारी और सीएम पुष्कर सिंह धामी के करीबी माने जाने वाले सुरेश गढ़िया भी दावेदारी की दौड़ में शामिल है। कपकोट कोश्यारी का गृह क्षेत्र होने के साथ-साथ विधानसभा क्षेत्र भी रहा है। माना जाता है कि अभी भी भाजपा की दावेदारी तय होते समय उनका अहम रोल रहता है। वर्तमान में कोश्यारी के दौरे के पूर्व जिस तरह से भाजपा में गहमागहमी और सक्रियता बढ़ती दिख रही है, उससे विधानसभा चुनाव में उम्मीदवारी को लेकर चर्चा-परिचर्चा होने के पूरे आसार दिख रहे हैं।
हालांकि विधायक भौर्याल ने कहा कि कोश्यारी निजी दौरे पर गांव आ रहे हैं। वह दीपावली पर अपने गांव में जनमिलन कार्यक्रम कर लोगों से मिलेंगे। इस दौरे को प्रदेश की राजनीति से जोड़कर देखना सही नहीं होगा।
जिला भ्रमण का कार्यक्रम
बागेश्वर। एडीएम चंद्र सिंह इमलाल ने बताया कि राज्यपाल कोश्यारी पांच नवंबर को एक बजे पिथौरागढ़ से रवाना होकर दो बजे किसमिला पहुचेंगे। रात्रि विश्राम गांव में करने के बाद छह नवंबर को सुबह 10:30 बजे शामा को रवाना होंगे। शामा के लोनिवि विश्राम गृह से दो बजे रवाना होकर 2:45 पर कपकोट के वन विभाग विश्राम गृह आएंगे। जहां से शाम को पांच बजे रवाना होकर बागेश्वर के लोनिवि विश्राम गृह आएंगे। जहां से सात नवंबर को वे देहरादून के लिए रवाना होंगे।