बागेश्वर में विधायक बलवंत की भौर्याल द्वारा सौंपी गई तलवार लहराते सीएम। संवाद न्यूज एजेंसी
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बागेश्वर। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के 103 दिन के कार्यकाल में भले ही नौकरशाही के काम करने के तौर-तरीकों पर कोई खास बदलाव देखने को नहीं मिला है, लेकिन मुख्यमंत्री ने जनता को सुशासन का संदेश देने की भरपूर कोशिश की। सुशासन के पाठ को चुनावी हथियार के रूप में देखा जा रहा है।
आंदोलन की देन उत्तराखंड में नौकरशाही के तौर-तरीकों पर न केवल जनता बल्कि सत्ता का संचालन कर रहे मंत्री तक सवाल उठाते रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने 29 मिनट के भाषण में सुशासन और नौकरशाही के रवैये पर फोकस रखा। उन्होंने नौकरशाही के कामकाज के तरीके पर सवाल खड़े करते हुए साफ-साफ शब्दों में कहा कि अफसरशाही के ठीक ढंग से काम न करने की बात उठती थी। उन्होंने सत्ता संभालने के तुरंत बाद से अच्छे अधिकारियों को अच्छा पद दिया। यह काम ऊपर से नीचे तक किया। उनका इशारा सूबे के मुख्य सचिव सुखवीर सिंह संधू की तैनाती और प्रशासनिक फेरबदल पर था।
सीएम ने जनता की नब्ज पकड़ते हुए समस्याओं का स्थानीय स्तर पर निराकरण और निराकरण न होने पर अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करने की बात कही। सीएम धामी की विधायकों और पार्टी जिलाध्यक्ष को सिफारिश न करने की नसीहत को भी इसी रूप में देखा जा रहा है।
सीएम धामी ने 24 हजार रिक्त पदों पर भर्ती की भर्ती, आयुसीमा में एक वर्ष की छूट देने की बात कहकर युवाओं को रिझाने की कोशिश की। सीएम धामी के पास अब दो महीने से भी कम समय बचा है। उसके बाद उन्हें चुनावी समर में जनता के पास जाना है। इस अवधि में वह कितना सुशासन दे पाते हैं। नौकरशाही पर कितनी नकेल कस पाते हैं, जनता को इससे कितना लाभ पहुंचता है, यह देखने वाली बात होगी।