बागेश्वर/कपकोट। जिले में वनाग्नि का दायरा बढ़ता जा रहा है। जिला मुख्यालय से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों के जंगल धधक रहे हैं। फायर सीजन शुरू होने के बाद से वनाग्नि की 69 घटनाएं हो चुकी हैं, 94 हेक्टेयर जलकर राख हो गया है। आग से जहां वन विभाग को करीब तीन लाख का नुकसान हुआ है, वहीं लोगों की परेशानियां भी बढ़ती जा रही हैं।
सोमवार की रात को काफलीगैर के जैन करास, कपकोट के जसरौली, कफलटॉप और धरमघर रेंज के उपराड़ा के जंगलों में आग लगी। आग लगने की सूचना मिलने के बाद वन विभाग की टीमों ने आग को काबूू करने का प्रयास किया। अब तक जिला मुख्यालय समेत गरुड़, कपकोट, कांडा, धरमघर, कपकोट और काफलीगैर के कई जंगल आग की चपेट में आ चुके हैं। वनाग्नि के कारण पर्यावरण प्रदूषण का स्तर भी लगातार बढ़ता जा रहा है। जिला मुख्यालय सहित घाटी वाले क्षेत्रों में धुआं फैल गया है। अस्पतालों में आंख, सांस और एलर्जी से संबंधित मरीजों की संख्या में इजाफा हो रहा है। चारा पत्ती के जलने से ग्रामीण क्षेत्र के पशुपालकों को दिक्कत हो रही है। वन्य जीवन भी संकट में घिर गया है। ग्रामीणों का कहना है कि हर साल आग से वन संपदा को भारी नुकसान होता है, बावजूद इसके वनाग्नि को रोकने के लिए ठोस उपाय नहीं किए जा सके हैं।
फायर वॉचरों की संख्या बढ़ाई
बागेश्वर। वन विभाग ने आग की घटनाओं में तेजी आने के बाद वनाग्नि सुरक्षा के इंतजाम भी तेज कर दिए हैं। जिले के सभी क्रू स्टेशनों में फायर वॉचरों की संख्या बढ़ा दी गई है। पूर्व में जिले के 29 क्रू स्टेशन में 87 फायर वॉचर थे, जिन्हें बढ़ाकर 116 कर दिया गया है। विभाग प्रत्येक ब्लॉक में नुक्कड़ नाटक, पंफलेट के माध्यम से वनाग्नि सुरक्षा को लेकर जागरूकता कार्यक्रम करा रहा है। आग लगाते पकड़े जाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है।
कोट
जंगलों को आग से बचाने के हरसंभव प्रयास किए जा रहे हैं। वनों में आग लगने की सूचना मिलते ही कर्मचारी मौके पर जाकर आग बुझाने का काम कर रहे हैं। अराजक तत्वों पर कार्रवाई की जा रही है, वहीं लोगों को वनों की रक्षा के लिए प्रेरित किया जा रहा है। मॉडल क्रू स्टेशन से भी वनाग्नि की घटनाओं को रोकने में काफी मदद मिल रही है।
हिमांशु बागरी, डीएफओ बागेश्वर