बागेश्वर में काले गेहूं-काले धान-काले की खेती की तरफ किसानों का रुझान बढ़ रहा हैं। जिले के दो प्रगतिशील किसानों ने अपने खेतों में इन अनाजों की पैदावार की है। दोनों ने अन्य किसानों को भी नई राह दिखाई है।
मणिपुर के काले धान और यूपी, पंजाब, मध्यप्रदेश के काले गेहूं की पैदावार अब बागेश्वर में भी होने लगी है। दोनों अनाज विटामिन आयरन और एंटी ऑक्सीडेंट से भरपूर हैं। काला गेहूं से मधुमेह रोगियों के लिए काफी लाभदायक है तो काला धान आंखों के लिए दावा है। काला गेहूं शुगर फ्री होता है।
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जिले के दो प्रगतिशील किसानों ने अपने खेतों में इन अनाजों की पैदावार की है। दोनों ने अन्य किसानों को भी नई राह दिखाई है।
चौरसों निवासी चंद्रशेखर पांडेय और कनस्यारी निवासी केशर सिंह भरड़ा ने दो साल पहले काले धान की खेती का ट्रायल किया। पंतनगर से काले धान और काले गेहूं के बीज लाकर अपने खेतों में उगाया। प्रयोग सफल रहा तो इन्होंने उत्पादन को बढ़ाने की सोची। पिछले साल और इस बार दोनों किसानों ने करीब पांच क्विंटल काले धान की पैदावार की है।
काले धान की अच्छी पैदावार हो रही है। इसे बाजार में 230 से 250 रुपये किलोग्राम तक बेच रहे हैं। काला गेहूं भी 130 से 150 रुपये किलोग्राम में बिक रहा है। -चंद्रशेखर पांडेय, प्रगतिशील काश्तकार, चौरसों