बागेश्वर। अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित बागेश्वर विधानसभा सीट वर्ष 1967 में बारामंडल (अल्मोड़ा) सीट से अलग होकर अस्तित्व में आई। राज्य गठन के बाद इस सीट का विभाजन हुआ। कपकोट और कांडा सीट अस्तित्व में आई। वर्ष 2012 में कांडा सीट समाप्त हो गई। अविभाजित उत्तर प्रदेश से अब तक इस सीट से तीन विधायक स्वर्गीय गोपाल राम दास, नारायण राम दास और राम प्रसाद टम्टा मंत्री रह चुके हैं। विधानसभा क्षेत्र में सबसे बड़ी समस्या पेयजल की है।
कुल मतदाता-117697 मतदाता
पुरुष मतदाता 59713
महिला मतदाता 57984
आठ बार कांग्रेस का रहा कब्जा
अविभाजित उत्तर प्रदेश से अब तक 2017 तक चुने गए विधायक
-वर्ष 1967 गोपाल राम दास कांग्रेस
-वर्ष 1969 सरस्वती टम्टा कांग्रेस
-वर्ष 1974 सरस्वती टम्टा कांग्रेस
-वर्ष 1977 पूरन चंद्र जनता पार्टी
-वर्ष 1980 गोपाल राम दास कांग्रेस
-वर्ष 1985 गोपाल राम दास कांग्रेस
-वर्ष 1989 गोपाल राम दास कांग्रेस
-वर्ष 1991 पूरन चंद्र भाजपा
-वर्ष 1993 राम प्रसाद टम्टा कांग्रेस
-वर्ष 1996 नारायण राम दास भाजपा
उत्तराखंड
-वर्ष 2002 राम प्रसाद टम्टा कांग्रेस
-वर्ष 2007 चंदन राम दास भाजपा
-वर्ष 2012 चंदन राम दास भाजपा
-वर्ष 2017 चंदन राम दास भाजपा
जंगली जानवरों का आतंक
दो-दो नदियां होने के बाद भी पानी की कमी
नगर में सीवर लाइन का निर्माण न होना
नगर में पार्किंग की व्यवस्था नहीं
जिला अस्पताल का अपना भवन नहीं
खेल स्टेडियम नहीं
रोडवेज डिपो नहीं
बागेश्वर में सबसे बड़ा मुद्दा जिला विकास प्राधिकरण और महायोजना का है। जनता अपनी जमीन पर मकान नहीं बना पा रही है। क्षेत्रीय विधायक समाधान नहीं करा पाए। कोविड नहीं होता तो स्वास्थ्य सुविधा में भी सुधार नहीं होता।
- प्रमोद मेहता अध्यक्ष प्राधिकरण हटाओ मोर्चा
हर पांच साल में चुनाव आते हैं, सरकारें बदलती हैं लेकिन व्यवस्था में बदलाव नहीं आ रहा है। स्वास्थ्य व्यवस्था, सरकारी स्कूलों के हालत बदतर है। रोजगार के साधन तक सरकारें पैदा नहीं कर पाई। राज्य गठन की मूल अवधारणा साकार होती नहीं दिख रही।
- पंकज पांडेय अध्यक्ष नागरिक मंच बागेश्वर
मूलभूत सुविधाएं नहीं मिल पाई हैं। सीवर लाइन का निर्माण हुआ है। बागेश्वर में लागू महायोजना के कारण लोगों को दिक्कत हो रही है। छोटे-मोटे विकास कार्य हो रहे हैं। कौन सी सरकार समस्याओं का समाधान करेगी, यह सबसे बड़ा सवाल है।
- गणेश दत्त कांडपाल
पांच साल का कार्यकाल उपलब्धियों भरा रहा है। बागेश्वर डिग्री कॉलेज को कैंपस का दर्जा दिलाया है। गरुड़ में नगर पंचायत का गठन कराया है। 132 केवी के विद्युत स्टेशन का निर्माण कराया है। खेल स्टेडियम को स्वीकृति दिलाई है। 1.55 करोड़ की लागत से बागनाथ और कालभैरव मंदिर का जीर्णोद्धार कराया जा रहा है। 2.12 करोड़ की लागत से नगर में टैक्सी स्टैंड बन रहा है। नदीगांव ठंडी सड़क का कार्य प्रगति पर है। गरुज में हेलीपैड, पार्किंग का निर्माण कराया है। गरुड़ में डिग्री कॉलेज भवन का निर्माण, 16 करोड़ की लागत से कौसानी-बैजनाथ मोटर मार्ग का निर्माण कराया जा रहा है। बैजनाथ में कृत्रिम झील का निर्माण और नौकायन शुरू कराई गई है।
- चंदन राम दास विधायक बागेश्वर
पांच साल में विकास के नाम पर ठगा गया है। विधायक ने पिछले चुनाव में जंगली जानवरों से निजात दिलाने का भरोसा दिलाया था। बागेश्वर में शराबबंदी की घोषणा की थी। जगह-जगह बीयर बार खोल दिए गए हैं। सीवर लाइन के निर्माण की घोषणा की थी, नहीं बना पाए। सड़कों की हालत खराब है। कई गांवों में सड़क तक नहीं है। कोविड काल में खरीदी गई स्वास्थ्य सामग्री, राशन वितरण, श्रमिकों के सामान वितरण में घपलेबाजी हुई है। 15 साल के कार्यकाल में जिला अस्पताल का भवन नहीं पाए। महिला अस्पताल की स्थापना तक नहीं कर पाए।
बालकृष्ण वर्ष 2017 के कांग्रेस प्रत्याशी
बागेश्वर में उत्तरायणी मेले को लेकर सरयू नदी पर अस्थाई पुल का निर्माण कार्य प्रगति पर। संवाद न्य?- फोटो : BAGESHWAR