बागेश्वर। ‘चुनाव आने के साथ ही वह चेहरे भी नजर आने लगे हैं जो पिछले पांच साल से दिखाई नहीं दे रहे थे।’ यह हकीकत है कपकोट के दूरस्थ गांव धूर की जिसे ग्रामीणों ने अपने शब्दों में कुछ यूं बयां किया ‘ जो लोग पांच साल बटी इलाकम देखन में नि उंछी उ आब चुनाव आते ही जाग-जाग देखिन भे गईं।’ इन दिनों अलग-अलग सियासी पार्टियों से जुड़े नेता अपनी पार्टी की उपलब्धियां गिनाने के साथ भविष्य की योजनाओं के जरिये मतदाताओं को लुभाने की कोशिश कर रहे हैं। लोगों का कहना है कि चुनाव के दौरान जो-जो वादे किए गए थे उन्हें पूरे करने की याद पूरे पांच साल नहीं आई।
संवाद न्यूज एजेंसी ने कपकोट के दूरस्थ ग्राम पंचायत के सोराग गांव के धूर तोक का भ्रमण कर वहां मतदाताओं से जमीनी हकीकत जानी। जिला मुख्यालय से करीब 60 किलोमीटर की दूरी पर बसा है धूर गांव। प्राकृतिक सौंदर्य से परिपूर्ण, पिंडारी ग्लेशियर के करीबी धूर गांव में 45 परिवारों और करीब 200 की आबादी निवास करती है। कहने के लिए धूर सोराग का तोक है लेकिन सोराग और धूर के बीच की दूरी करीब 10 किमी है। ठंड के दौरान गांव बर्फ से लकदक रहता है। विषम परिस्थितियों में लोगों को जीवनयापन करना पड़ता है।
गांव के लोग क्षेत्र के विकास की उम्मीद में लोकतंत्र के महापर्व में हर बार भागीदारी करते हुए मतदान करते हैं लेकिन चुनाव होने के बाद दिन, महीने और साल बीतने के साथ उनकी उम्मीदें चकनाचूर हो जाती हैं। चुनाव से पहले नेतागण कई लुभावने वादे करके जाते हैं, लेकिन जीतने के बाद किसी को दूरस्थ गांव आने की सुध तक नहीं रहती है। ऐसे में जनता खुद को ठगा हुआ महसूस करती है। बावजूद इसके लोग विकास की उम्मीद में एक बार फिर से आगामी विधानसभा चुनाव में मतदान करने को तैयार हैं।
शिक्षा के लिए भी जद्दोजहद
बागेश्वर। गांव का प्राथमिक विद्यालय चार किलोमीटर दूर उनिया में है, जहां के लिए बच्चों को पैदल दूरी तय करनी पड़ती है। गांव से करीब एक किमी की दूरी पर जूनियर हाईस्कूूल है, लेकिन हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की शिक्षा के लिए छात्र-छात्राओं को इंटर कॉलेज सोराग जाना पड़ता है।
5जी के जमाने में टूजी नेटवर्क
बागेश्वर। पिंडर घाटी के अन्य गांवों की तरह धूर भी संचार सेवा से विहीन गांव है। कहने के लिए यहां बीएसएनएल का टावर लगा है लेकिन यहां सिर्फ टूजी नेटवर्क ही काम करता है। अक्सर यह खराब ही रहता है, जिसके चलते क्षेत्र देश-दुनिया से अलग-थलग है।
हर बार गांव और क्षेत्र के विकास की आस को लेकर मतदान करते हैं लेकिन अब तक की सरकारें सड़क लाने के सिवा कोई विकास नहीं कर सकीं हैं। पिंडारी ग्लेशियर का करीबी गांव होने के चलते यहां पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं, लेकिन सरकार और नेताओं ने कभी क्षेत्र के समुचित विकास को काम नहीं किया। ग्रामीण विषम परिस्थितियों में किसी तरह से जीवनयापन कर रहे हैं।
- हंसी देवी, महिला मतदाता, धूर
आगामी विधानसभा चुनाव में मुझे पहली बार मतदान का मौका मिलेगा, जिसे लेकर उत्साहित हूं लेकिन अपने वोट का सदुपयोग होते भी देखना चाहती हूं। दूरस्थ क्षेत्र में किसी भी सरकार ने शिक्षा, स्वास्थ्य, स्वरोजगार, संचार को बढ़ावा देने के लिए अब तक कार्य नहीं किया है। उम्मीद है आने वाली सरकार इस ओर ध्यान देखी और प्राकृतिक नजारों से सुशोभित हमारा गांव भी विकास करेगा।
- कविता दानू, युवा वोटर, धूर
दूरस्थ गांवों में रोजगार के कोई साधन नहीं है। गांव सड़क से जुड़ा है लेकिन अन्य मूलभूत सुविधाएं नहीं मिली। नेतागण अपने वादों पर अमल नहीं करते हैं, जिसके कारण प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर गांवों को छोड़कर लोग शहरों की दौड़ लगा रहे हैं। स्कूल दूर होने से कई लड़कियां हाईस्कूल से आगे नहीं पढ़ पाती हैं। अब भी गांव और क्षेत्र को विकास का इंतजार है।
- चंद्रा देवी, महिला वोटर, धूर