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जिला अस्पताल में हंस फाउंडेशन संचालित करेगा डायलिसिस सेंटर

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मंडलसेरा से लिया गया बागेश्वर का फोटो। संवाद न्यूज एजेंसी - फोटो : BAGESHWAR
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शंकर पांडेय
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बागेश्वर। जिले के दूरस्थ इलाकों में स्वास्थ्य सुविधाओं के क्षेत्र में सेवारत संस्था हंस फाउंडेेशन जल्द ही जिला अस्पताल में डायलिसिस सेंटर चलाएगा। प्रदेश के सभी राज्यों में फाउंडेशन एक-एक डायलिसिस सेंटर लगाने जा रहा है। जिला अस्पताल में डायलिसिस सेंटर बनने से किडनी के मरीजों को रक्त शुद्धीकरण के लिए बाहरी जिलों में दौड़ लगाने से राहत मिलेगी। समय और धन की बचत भी होगी।
डायलिसिस प्रक्रिया में किडनी फेल होने या किडनी में संक्रमण की परेशानी से जूझ रहे लोगों के रक्त का शुद्धीकरण किया जाता है। अभी जिले में यह उपचार सुलभ नहीं है। इसके लिए लोगों को बाहरी जिलों में जाना पड़ता है। महीने में एक बार होने वाली इस प्रक्रिया के लिए मरीजों को हर महीने करीब 15 से 20 हजार रुपये खर्च करने पड़ते हैं। जिला अस्पताल में सुविधा मिलने से यह राशि आधे से भी कम हो जाएगी। आने-जाने का समय भी बचेगा।
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जिला अस्पताल के एक कक्ष में डायलिसिस सेंटर स्थापित किया जाएगा जहां करीब आठ लाख रुपये की लागत से डायलिसिस मशीन लगाई जाएगी। इसका संचालन संस्था स्वयं करेगी। इससे मशीनों के रखरखाव और देखरेख की जिम्मेदारी भी बेहतर होगी। वहीं विशेषज्ञ के रहने से मरीजों को हर समय सुविधा का लाभ मिलेगा।
खाती में डिस्पेंसरी का हो रहा संचालन
बागेश्वर। हंस फाउंडेशन जिले के दूरस्थ क्षेत्रों में लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया करा रहा है। इसके तहत पिंडर घाटी के अंतिम गांव खाती में सब एलोपैथिक डिस्पेंसरी का संचालन किया जा रहा है। इसके दो केंद्र धूर और बदियाकोट में बनाए गए हैं। डिस्पेंसरी में मरीजों को निशुल्क एलोपैथिक और आयुर्वेदिक उपचार समेत दवाइयां भी मुफ्त दी जाती हैं।
लैब में लोगों की रक्त संबंधी जांच भी निशुल्क की जाती है। वहीं क्षेत्र के कुंवारी, सोराग, तीख, किलपारा, बोरबलड़ा आदि गांवों में शिविर लगाकर लोगों का निशुल्क इलाज भी किया जाता है। डिस्पेंसरी में एक एलोपैथिक और एक आयुर्वेदिक डॉक्टर समेत लैब तकनीशियन, फार्मासिस्ट तैनात हैं। संस्था ने कपकोट सीएचसी को एक एंबुलेंस भी दिलाई है।
मेडिकल मोबाइल यूनिट से मिलेगा बेहतर इलाज
बागेश्वर। हंस फाउंडेशन की नई पहल मेडिकल मोबाइल यूनिट है। इसका उद्देश्य सीमांत और दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराना है। फिलहाल योजना के तहत चलाए जा रहे पांच वाहनों का शुभारंभ ऊधमसिंह नगर से हो गया है। हालांकि अभी यह सुविधा जिले में नहीं है।
जिले में पूर्व में सचल मेडिकल वाहन का संचालन होता था। जो अब बंद हो गया है। अगर क्षेत्र के लोगों ने मांग की तो यहां भी मेडिकल मोबाइल यूनिट का संचालन हो सकता है। इस वाहन में हर समय एक डॉक्टर, एक नर्स, एक फार्मासिस्ट, एक ड्राइवर तैनात रहता है। जो मरीजों की निशुल्क जांच, उपचार कर दवाइयां भी देते हैं।
जनप्रतिनिधियों ने नहीं की मांग, वर्ना जिले में भी चलती यूनिट
बागेश्वर। हंस फाउंडेशन स्वास्थ्य के क्षेत्र में कई योजनाएं चला रहा है, लेकिन जिले के जनप्रतिनिधियों की उदासीनता से यहां के लोगों को इसका लाभ नहीं मिल रहा है। जिन क्षेत्रों में जनप्रतिनिधि सक्रिय और जागरूक हैं, वहां कई सुविधाएं प्रदान की जा रही हैं।
यहां से मांग न होने के कारण लोग संस्था की ओर से मिल रही निशुल्क स्वास्थ्य सुविधाओं से वंचित हैं। वहीं आम जनता को भी इसकी जानकारी न होने से जिले में मेडिकल मोबाइल यूनिट जैसी सुविधा नहीं मिल पाई है।
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प्रत्येक जिले में डायलिसिस सेंटर स्थापित करने की योजना पर जल्द काम शुरू होगा। जिले से फिलहाल मोबाइल मेडिकल यूनिट की मांग का कोई प्रस्ताव नहीं मिला है। इस कारण जिले में इस योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा है। जनप्रतिनिधियों से प्रस्ताव मिला तो उसे उच्चाधिकारियों को भेजकर पास करवाने का प्रयास किया जाएगा।
- एनबी अवस्थी, परामर्शदाता, हंस फाउंडेशन, बागेश्वर।
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