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68 आपदा प्रभावितों में से केवल 22 का हो सका विस्थापन

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बागेश्वर का आपदा प्रभावित गांव कुंवारी। विज्ञप्ति - फोटो : BAGESHWAR
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बागेश्वर। आपदा की दृष्टि से संवेदनशील जिले में आपदा प्रबंधन के कार्य काफी सुस्त गति से चल रहे हैं। वर्ष 2013 से 2018 तक जिले में कई आपदाओं में प्रभावित लोगों के विस्थापन के लिए हुए कार्य इसकी बानगी पेश कर रहे हैं। आपदा प्रभावित क्षेत्रों में 68 परिवारों को अति संवेदनशील मानते हुए यथाशीघ्र विस्थापित किया जाना था, लेकिन प्रशासन केवल 22 परिवारों को ही पक्का मकान देकर विस्थापित कर सका है। आपदा प्रबंधन कार्यों में सबसे बुरा हाल कपकोट के अंतिम गांव कुंवारी का है। जहां 18 अतिसंवेदनशील और 58 संवेदनशील परिवारों को विस्थापित किया जाना है। पुनर्वास के लिए राशि स्वीकृत होने के बावजूद परिवार विस्थापन की बाट जोह रहे हैं।
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जिला मुख्यालय से करीब 65 किमी की दूरी पर बसे कुंवारी गांव के लिए बदियाकोट से 12 किमी की दूरी पैदल तय करनी पड़ती है। गांव में वर्ष 2013 में भारी आपदा आई और भूस्खलन से पूरा गांव खतरे की जद में आ गया। प्रशासन ने जांच करने के बाद 76 परिवारों को अतिसंवेदनशील और संवेदनशील मानते हुए विस्थापित करने की बात कही। विस्थापितों के पुनर्वास के लिए शासन से राशि भी स्वीकृत हो गई, बावजूद इसके ग्रामीणों को विस्थापित नहीं किया जा सका है। वर्ष 2018 में भी गांव की पहाड़ी से करीब एक सप्ताह तक भूस्खलन हुआ। इस दौरान भी ग्रामीणों को सुरक्षित स्थानों पर बसाने की मांग उठी, लेकिन कुछ समय बाद यह मामला भी ठंडा पड़ गया।
कुंवारी की ग्राम प्रधान धर्मा देवी ने बताया कि आपदा के बाद से गांव के पैदल रास्तों की मामूली मरम्मत ही हुई है। पेयजल योजनाएं अब भी टूटी हैं। उरेडा से गांव में बिजली मिलती थी, लेकिन आपदा में तार और पोल टूट गए। यह गांव ग्रिड की बिजली से नहीं जुड़ सका है। लोग व्यक्तिगत सोलर लाइटों की मदद से रोशनी करते हैं। उन्होंने बताया कि प्रशासन ग्रामीणों को अन्यत्र विस्थापित करने की बात करता है, जिसके एवज में रहने के लिए मकान मिलने की बात की जाती है। गांव में लोग खेती कर जीवनयापन करते हैं, उन्हें अन्यत्र जमीन नहीं मिलेगी तो घर खर्चा चलाना मुश्किल हो जाएगा।
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2.60 करोड़ से होना है पुनर्वास
बागेश्वर। जिले में छह वर्षों के दौरान आई प्राकृतिक आपदा में दोबाड़ गांव के 13, बड़ेत के 11, कुंवारी के 18, फुलई के पांच, मल्लादेश के चार, बदियाकोट के सात, सेरी के आठ, जाख के दो परिवारों को आपदा की दृष्टि से अतिसंवेदनशील घोषित किया गया था। इनके पुनर्वास के लिए 2.60 करोड़ की राशि शासन से स्वीकृत हुई। स्वीकृत राशि के सापेक्ष बड़ेत, सेरी, फुलई के कुछ परिवारों का ही पुनर्वास हो सका है।
आपदा प्रभावितों को विस्थापित करने का काम प्रगति पर है। कुंवारी को छोड़कर अन्य सभी गांवों के प्रभावितों को अन्यत्र विस्थापित किया जा रहा है। कुंवारी गांव के लोगों के पुनर्वास में समस्या आ रही है। ग्रामीणों को जमीन का चयन कर पट्टे प्रदान किए थे, लेकिन ग्रामीण चयनित भूमि पर बसने के लिए तैयार नहीं हैं। जब ग्रामीण राजी होंगे तो पहले अतिसंवेदनशील और फिर संवेदनशील परिवारों को विस्थापित करने की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। - चंद्र सिंह इमलाल, एडीएम, बागेश्वर।
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