नेपाली मजदूर के नाम पर जारी आधार कार्ड।
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भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण की ओर से बनाए जाने वाले आधार कार्ड नेपाली नागरिकों को जारी कर दिए गए। बागेश्वर में कई नेपाली मजदूर जेब में आधार कार्ड लिए घूम रहे हैं। नियम कायदों को ताक पर रखकर गैर भारतीयों को आधार कार्ड जारी करने से प्रशासन और एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर बड़े सवाल खड़े हो गए हैं। नेपालियों को आधार कार्ड जारी होने की भनक सुरक्षा एजेंसियों तक को नहीं है।
बागेश्वर जिला एक ओर चीन और नेपाल सीमा से लगे पिथौरागढ़ जनपद तो दूसरी ओर चमोली जिले से लगा हुआ है। हाल के दिनों में जिले के तमाम गांवों में पर्चे चिपकाने की घटनाओं से यहां पर माओवादियों के भी सक्रिय होने के प्रमाण मिल चुके हैं। नेपाल लंबे समय तक माओवाद से प्रभावित रहा है। मजदूरी के लिए हर साल हजारों की तादाद में नेपाल से मजदूर बागेश्वर जिले में आते हैं। पूर्व में माओवादी गतिविधियों में लिप्त रहे नेपाली नागरिकों के भी भारत की ओर रुख करने की आशंका बनी रहती है। इसके बावजूद बिना जांच पड़ताल के भारत आने वाले नेपालियों को आधार कार्ड जारी कर दिए गए। बागेश्वर में कई नेपाली परिवारों के हर सदस्य के आधार कार्ड बने हैं।
किराए के मकानों या टेंटों में रहकर मजदूरी करने वाले इन सभी नेपाली मजदूरों को स्थानीय पते पर आधार कार्ड जारी किए गए हैं। भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण की ओर से भारतीय नागरिकों को जारी होने वाले आधार कार्ड में संबंधित व्यक्ति की पूरी डिटेल मौजूद रहती है। राशन कार्ड और बैंक के खातों से लेकर मोबाइल नंबर तक इस समय आधार कार्ड से जोड़े जा रहे हैं। आधार कार्ड को वर्तमान में पहचान पत्र के रूप में सबसे अधिक इस्तेमाल किया जा रहा है। ऐसे में यदि पूर्व में आपराधिक पृष्ठभूमि वाले नेपाली नागरिकों को आधार कार्ड मिला तो भविष्य में उसके दुरुपयोग की पूरी आशंका रहेगी। आधार कार्ड बनाने वाली एजेंसियों ने बिना प्रमाण के कैसे गैर भारतीयों को आधार कार्ड जारी कर दिए यह बड़ा गंभीर सवाल बन गया है।