बदरीनाथ धाम के ऊपर सतोपंथ सरोवर के पास ‘नई झील’ पर 48 घंटे के भीतर ही सवाल खड़ा हो गया है। दो दिन पहले ही नेशनल रिमोट सेंसिंग सेंटर (एनआरएससी) हैदराबाद ने 21 जून को लिए सेटेलाइट चित्र के आधार पर अलकनंदा नदी के मुहाने पर नई झील बनने की पुष्टि की थी।
उत्तराखंड स्पेस एप्लिकेशन सेंटर (यू-सैक) के निदेशक डा. एमएम किमोठी ने इसी चित्र को आधार बनाते हुए इससे पैदा हो सकने वाले खतरे के बारे में सरकार को आगाह भी किया।
लेकिन अगले ही दिन शुक्रवार को यू-सैक ने झील के पूरी तरह बंद न होने की बात कहते हुए इससे किसी तरह के खतरे की बात को नकार भी दिया। अब वाडिया हिमालयन भू-विज्ञान संस्थान ने हवाई सर्वेक्षण के आधार पर जो जानकारी मुहैया कराई है, उसने झील के अस्तित्व पर ही सवालिया निशाना खड़ा कर दिया है।
सर्वेक्षण केलिए गई टीम के नतीजे को माना जाए तो सतोपंथ ग्लेशियर के पास कोई नई झील बनी ही नहीं है। एनआरएससी ने जिसे झील बताया है,वह मोरेंस मैटीरियल है।
माणा गांव के चार युवा भी पैदल सतोपंथ गए
सेना और भूगर्भ वैज्ञानिकों की चार सदस्यीय टीम ने शनिवार को सतोपंथ झील का हवाई सर्वेक्षण किया। टीम ने जोशीमठ से दोपहर दो बजे सतोपंथ के लिए उड़ान भरी और करीब एक घंटे बाद टीम जोशीमठ लौट आई।
हालांकि, शासन अपनी घोषणा के अनुसार अभी तक झील का स्थलीय निरीक्षण नहीं करवा सका है, अलबत्ता चमोली जिले की माणा ग्राम पंचायत ने झील की वस्तुस्थिति जानने के लिए युवाओं का चार सदस्यीय दल सतोपंथ के लिए रवाना किया है।
यह दल रात सतोपंथ में ही बिताएगा। इधर, झील को लेकर शनिवार को भी लोगों में दहशत बनी रही। कहा जा रहा है कि अलकनंदा में भी सामान्य से अधिक पानी बह रहा है।
तो सेटेलाइट आकलन में चूक
'एनआरएससी से शायद सेटेलाइट चित्र के आकलन में चूक हुई है। यह बर्फीला जोन है, जिसे पानी की जमावट बताया जा रहा है, वह दरअसल चट्टान है।'
डा. विक्रम गुप्ता, जियो टेक्निकल विशेषज्ञ, वाडिया हिमालयन भू-विज्ञान संस्थान (हवाई सर्वेक्षण में शामिल)
एवलांचे जोन का रिफ्लेक्शन
'सतोपंथ ग्लेशियर केसमीप जिस क्षेत्र का सेटेलाइट चित्र एनआरएससी ने मुहैया कराया है, वह एवलांचे (बर्फीला तूफान) जोन है। यह झील न होकर संभवत: उसका रिफ्लेक्शन है।'
डा. अनिल कुमार गुप्ता, निदेशक, वाडिया हिमालयन भू-विज्ञान संस्थान।